वंदे मातरम् की चर्चा पर कांग्रेस विधायकों का हंगामा मार्शलों से हाथापाई, 9 विधायक सदन से बाहर किए गए

हरियाणा विधानसभा के विंटर सेशन में वंदे मातरम् की चर्चा पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया। मार्शलों से हाथापाई हुई और सीएम ने अविश्वास प्रस्ताव पर साइन न होने पर तंज कसा।

वंदे मातरम् की चर्चा पर कांग्रेस विधायकों का हंगामा मार्शलों से हाथापाई, 9 विधायक सदन से बाहर किए गए
  • वंदे मातरम् की चर्चा पर कांग्रेस विधायकों का हंगामा
  • मार्शलों से हाथापाई, 9 विधायक सदन से बाहर किए गए
  • सीएम बोले- अविश्वास प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष के साइन नहीं


हरियाणा विधानसभा के विंटर सेशन के दूसरे दिन सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। शून्यकाल के बाद वंदे मातरम् पर चर्चा के प्रस्ताव को स्पीकर हरविंद्र कल्याण द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया। लंच के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चर्चा की शुरुआत की और इसे राष्ट्र के लिए वंदनीय बताते हुए युवाओं को इतिहास से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उस समय के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को अपनी कुर्सी डोलती हुई नजर आई थी। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस विधायक भड़क उठे और पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक अपनी सीट छोड़कर वेल में पहुंच गए।

हंगामा बढ़ने पर स्पीकर ने नियमों के उल्लंघन के चलते कांग्रेस के 9 विधायकों को नेम करते हुए सदन से बाहर जाने का आदेश दिया। वेल में खड़े मार्शलों ने जब विधायकों को बाहर जाने को कहा तो उन्होंने इनकार कर दिया। इस दौरान कांग्रेस विधायकों और मार्शलों के बीच हाथापाई हो गई। बाद में मार्शलों ने विधायकों को बाहर निकाला। कुछ समय बाद मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की अपील पर इन विधायकों को दोबारा सदन में बुला लिया गया।

वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। इसी बीच मंत्री अनिल विज के हस्तक्षेप के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी शुरू हो गई। स्पीकर ने सदन को शांत रखने की अपील करते हुए वंदे मातरम् की गरिमा बनाए रखने की बात कही।

इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने प्रस्ताव को ध्यान से पढ़ा और अपना चश्मा साफ करके भी देखा, लेकिन उसमें नेता प्रतिपक्ष के साइन नजर नहीं आए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संभव है नेता प्रतिपक्ष खुद को अभी तक नेता प्रतिपक्ष ही नहीं मानते। मुख्यमंत्री द्वारा शेर पढ़े जाने के बाद कांग्रेस विधायकों ने फिर से जोरदार हंगामा किया और सदन में माहौल गरमा गया।

  • विंटर सेशन में अविश्वास प्रस्ताव पर CM का तंज
  • सीएम बोले मैंने चश्मा साफ कर देखा, नेता विपक्ष के साइन नहीं

हरियाणा विधानसभा के विंटर सेशन के दौरान अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सियासत गरमा गई है। सदन में कांग्रेस द्वारा नायब सिंह सैनी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बीच मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा तंज कसा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद अपना चश्मा साफ करके अविश्वास प्रस्ताव के कागजात देखे हैं, लेकिन उसमें विपक्ष के नेता के हस्ताक्षर ही नहीं हैं।

सीएम ने सदन में कहा कि अविश्वास प्रस्ताव जैसे गंभीर मुद्दे पर विपक्ष की तैयारी और गंभीरता साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के नेता के ही साइन प्रस्ताव पर नहीं हैं, तो यह सवाल खड़ा करता है कि क्या विपक्ष खुद इस प्रस्ताव को लेकर एकजुट है या नहीं। मुख्यमंत्री के इस बयान पर सदन में सत्ता पक्ष की ओर से मेजें थपथपाई गईं।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हो सकता है विपक्ष के नेता अभी तक खुद को नेता विपक्ष ही नहीं मानते हों। उन्होंने कहा कि अगर नेता विपक्ष खुद अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट नहीं हैं, तो सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कैसे गंभीर माना जाए। सीएम ने यह भी कहा कि सरकार पूरी मजबूती के साथ सदन में मौजूद है और हर सवाल का जवाब देने को तैयार है।

विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज सदन में लंबी चर्चा होने की संभावना है। सत्ता पक्ष का दावा है कि उसके पास पूर्ण बहुमत है, जबकि विपक्ष सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहा है। विंटर सेशन के दूसरे दिन यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है और सदन का माहौल लगातार गर्म बना हुआ है।

  • हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार, आज होगी चर्चा
  • BJP पूर्ण बहुमत के साथ तैयार, कांग्रेस के पास संख्याबल कम
  • INLD वेट एंड वॉच मोड में, समर्थन पर नहीं खोले पत्ते


हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सियासी टकराव तेज होने वाला है। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को विधानसभा स्पीकर हरविंदर कल्याण ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही यह प्रस्ताव सदन की कार्यसूची में शामिल कर लिया गया है और आज शुक्रवार को दोपहर बाद इस पर चर्चा तय की गई है।

कांग्रेस ने राज्य सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। स्पीकर की मंजूरी के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष एक बार फिर सदन में आमने-सामने होंगे। चर्चा के बाद मतदान होगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सरकार को सदन का विश्वास प्राप्त है या नहीं।

हरियाणा की राजनीति में अविश्वास प्रस्ताव कोई नया घटनाक्रम नहीं है। इससे पहले मनोहर लाल खट्टर सरकार के दौरान कांग्रेस दो बार, वर्ष 2021 और 2024 में, अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी, लेकिन दोनों ही बार प्रस्ताव गिर गया था। नायब सैनी सरकार के कार्यकाल में यह पहला अवसर है, जब विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।

सदन के गणित की बात करें तो हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों में से बीजेपी के पास 48 विधायक हैं। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी सरकार को प्राप्त है, जिससे सरकार के पक्ष में 51 विधायकों का आंकड़ा बनता है। स्पीकर को हटाने के बाद भी सरकार के पास 50 विधायकों का समर्थन है, जबकि विश्वास बनाए रखने के लिए 46 विधायकों की जरूरत होती है। ऐसे में बीजेपी पूरी मजबूती के साथ सदन में उतरेगी।

वहीं कांग्रेस के पास फिलहाल 37 विधायक हैं। विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस के पास प्रस्ताव पारित कराने के लिए आवश्यक संख्याबल नहीं है। इंडियन नेशनल लोकदल के दो विधायक सदन में मौजूद हैं, लेकिन पार्टी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह कांग्रेस के प्रस्ताव का समर्थन करेगी या नहीं।

INLD ने इस पूरे मामले पर वेट एंड वॉच की नीति अपनाई है। पार्टी के मीडिया सलाहकार राकेश सिहाग के अनुसार, यदि कांग्रेस जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाती है तो इनेलो समर्थन कर सकती है, लेकिन राजनीतिक उद्देश्य हावी रहने की स्थिति में पार्टी विरोध में मतदान करेगी।

शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में कई अहम घटनाक्रम देखने को मिले। आठ विधेयक सदन में प्रस्तुत किए गए। प्रश्नकाल के दौरान स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कार्यवाही की शुरुआत में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और सदन में दो मिनट का मौन रखा गया। इसके अलावा गुरु तेगबहादुर जी के शहीदी दिवस को लेकर भी सदन में चर्चा हुई।


  • सदन में अनिल विज की शायरी, हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष बनने पर बधाई
  • मुख्यमंत्री नायब सैनी का शोक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित
  • अपराध, धान घोटाला, वोट चोरी और खिलाड़ियों की मौत पर हंगामे के आसार


हवाएं चाहे कितनी भी खिलाफ क्यों न हों, सदन में वही जलता है जो जिद पर अड़ा रहता है। हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत शायरी, सियासत और सख्त तेवरों के साथ हुई। सदन में मंत्री अनिल विज ने नेता प्रतिपक्ष बनने पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को शायराना अंदाज में बधाई देते हुए कहा कि हवाएं लाख मुखालिफ हों, दिया वही जलेगा जो जिद पर अड़ा है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सत्र के पहले दिन सदन में शोक प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर तक चलेगा और इस दौरान तीन बैठकें होंगी। सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं, क्योंकि विपक्ष ने कई बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रखी है।

सत्र के दौरान अपराध, मंडियों में धान घोटाला, वोट चोरी, बीपीएल कार्ड और खिलाड़ियों की मौत के मामलों को लेकर तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाएगी। इसके साथ ही हरियाणा सरकार छह से अधिक विधेयक सदन में पेश कर सकती है।

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सत्ता पक्ष मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में पिछले दिनों किए गए विकास कार्यों और सरकारी उपलब्धियों का ब्यौरा सदन में रखेगा। सूत्रों के मुताबिक, तीन बैठकों वाले इस सत्र में मुख्यमंत्री कुछ बड़ी घोषणाएं भी कर सकते हैं।

यह सत्र 15वीं विधानसभा में पहला मौका होगा, जब कांग्रेस अपने नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ पूरी एकजुटता में सदन में नजर आएगी। कांग्रेस ने शीतकालीन सत्र से पहले विधायकों की बैठक कर रणनीति तय की है। वहीं, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी अपने आवास पर विधायक दल और मंत्रियों के साथ बैठक कर सभी सवालों के ठोस और स्पष्ट जवाब तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

कार्य सलाहकार समिति की बैठक के बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि सरकार हर विषय और हर बिंदु पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से सार्थक चर्चा करने और जनहित के मुद्दे उठाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार अपनी बात रखती है तो विपक्ष वॉकआउट करता है, जबकि उन्हें सरकार की बात भी सुननी चाहिए।

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री ने भी शायराना अंदाज में कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उम्र भर भूल यही करता रहा, धूल चेहरे पर जमी थी और आईना साफ करता रहा। मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि सरकार सत्र में पूरी तैयारी और आंकड़ों के साथ विपक्ष का सामना करेगी।

कार्य सलाहकार समिति की बैठक विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण की अध्यक्षता में हुई, जिसमें यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि शीतकालीन सत्र 18 से 22 दिसंबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार मानसून सत्र के छह महीने बाद ही अगला सत्र होना चाहिए था, जो 26 फरवरी को बनता है, इसके बावजूद सरकार ने समय से पहले शीतकालीन सत्र बुलाया है। उन्होंने कांग्रेस सरकारों के दौरान कम सत्र बुलाए जाने का भी जिक्र किया।