आईपीएस वाई पूरन कुमार की मौत से जुड़े विवाद में घिरे शत्रुजीत कपूर का नाम DGP पैनल में सबसे ऊपर
वाई पूरन कुमार सुसाइड मामले में नाम आने के बावजूद शत्रुजीत कपूर हरियाणा के DGP पैनल में सबसे ऊपर। सरकार ने 7 IPS का पैनल भेजा, नया DGP नए साल में।
- सुसाइड विवाद में नाम आने के बावजूद DGP पैनल में शत्रुजीत कपूर सबसे ऊपर
- हरियाणा में 7 IPS अफसरों की लिस्ट तैयार, नया DGP नए साल में
- वाई पूरन कुमार के सुसाइड नोट में तीन अधिकारियों का नाम, फिर भी पैनल में शामिल
हरियाणा में नए साल पर नया पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सरकार ने 7 आईपीएस अफसरों का पैनल तैयार कर लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सुसाइड मामले में विवादों में आने और छुट्टी पर भेजे जाने के बावजूद आईपीएस शत्रुजीत कपूर का नाम लिस्ट में पहले नंबर पर रखा गया है।
आईपीएस वाई पूरन कुमार के सुसाइड मामले में नाम सामने आने के बाद सरकार ने शत्रुजीत कपूर को लंबी छुट्टी पर भेज दिया था। उनकी जगह आईपीएस ओपी सिंह को एडिशनल डीजीपी का चार्ज दिया गया था। हालांकि, पैनल में ओपी सिंह और मोहम्मद अकील का नाम शामिल नहीं किया गया, क्योंकि दोनों 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं।
पैनल में जिन अफसरों के नाम भेजे गए हैं उनमें शत्रुजीत कपूर, अजय सिंघल, संजीव जैन, आलोक मित्तल, एएस चावला, नवदीप सिंह विर्क और उनकी पत्नी कलाराम चंद्रन का नाम शामिल है। इन तीन नामों – कपूर, विर्क और कलाराम – को पैनल में आगे माना जा रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 30 साल सर्विस पूरी करने वाले IPS अफसरों के नाम ही पैनल में भेजे जाते हैं, और इन अधिकारियों की सर्विस अवधि इस नियम के अनुसार पूरी हो चुकी है।
शत्रुजीत कपूर की सबसे बड़ी ताकत उनकी सीनियरिटी बताई जा रही है। 1988 बैच के मनोज यादव, 1989 के मोहम्मद अकील, 1990 के देशराज और 1991 बैच के आलोक कुमार राय रिटायर या एक्सटेंशन पर हैं। जबकि कपूर का रिटायरमेंट अक्टूबर 2026 में है, इसलिए नियमों के मुताबिक उनका नाम पैनल में शामिल किया गया है।
विवाद का बड़ा पहलू
वाई पूरन कुमार के सुसाइड नोट में जिन 15 IPS और IAS अधिकारियों के नाम लिखे बताए जाते हैं, उनमें शत्रुजीत कपूर, नवदीप विर्क और कलाराम चंद्रन भी शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि यही तीनों नाम पैनल में टॉप पर माने जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यह तीनों अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाते हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि सरकार की मंशा शत्रुजीत कपूर को वापस DGP लाने की होती, तो पैनल भेजने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की जाती। प्रक्रिया शुरू होने के बाद कपूर की वापसी पर अब सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं।
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