नायब सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट 10 इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप पर संकट के बादल, इन जिलों में विरोध

हरियाणा सरकार के 10 आईएमटी प्रोजेक्ट पर जमीन संकट, किसानों ने पोर्टल पर सिर्फ 7 हजार एकड़ ऑफर किया जबकि 35 हजार एकड़ की जरूरत। जींद, नूंह और पलवल में विरोध तेज।

नायब सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट 10 इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप पर संकट के बादल,  इन जिलों में विरोध

➤ हरियाणा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट 10 आईएमटी पर जमीन संकट
➤ किसानों ने ई-भूमि पोर्टल पर सिर्फ 7 हजार एकड़ जमीन ऑफर की
➤ जींद, नूंह और पलवल में भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज



हरियाणा की नायब सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट 10 इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) बनाने पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य प्रदेश में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देना तथा रोजगार के अवसर पैदा करना है। लेकिन इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती जमीन का इंतजाम बन गई है।

सरकार ने पहले फेज में अंबाला, जींद, रेवाड़ी और फरीदाबाद-पलवल में 6 नई आईएमटी बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए कुल 35,500 एकड़ जमीन की जरूरत है। किसानों से जमीन स्वेच्छा से देने के लिए ई-भूमि पोर्टल खोला गया था, जिसकी डेडलाइन 31 अगस्त 2025 तय की गई थी। लेकिन इस अवधि में किसानों ने सिर्फ 7,000 एकड़ जमीन ही ऑफर की।

स्थिति यह है कि जींद, नूंह और पलवल जैसे जिलों में किसानों ने भूमि अधिग्रहण का खुला विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार किसानों को उनकी जमीन से वंचित करना चाहती है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ई-भूमि पोर्टल पर किसानों की सहमति खुद भर रही है, जो एक बड़ा धोखा है। उन्होंने मांग की है कि इसकी जांच होनी चाहिए।

हालांकि सरकार का दावा है कि आईएमटी बनाने में किसी प्रकार की रुकावट नहीं है। उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और सरकारी अफसरों ने साफ किया है कि किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी। बल्कि बातचीत और मोलभाव के जरिए समाधान निकाला जाएगा। किसान अपनी मनचाही रेट मांग सकते हैं, जिसके बाद कलेक्टर रेट और बाजार कीमत के हिसाब से सहमति बनाई जाएगी।

प्रस्तावित आईएमटी में सबसे बड़ी टाउनशिप जींद जिले में बनेगी, जिसमें 12 हजार एकड़ जमीन चाहिए। वहीं अंबाला, नारायणगढ़, रेवाड़ी और फरीदाबाद-पलवल में भी 5 से 13 हजार एकड़ जमीन की जरूरत है। इनमें से कई लोकेशन नए एक्सप्रेस-वे और जेवर एयरपोर्ट के करीब होंगे, जिससे निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।

प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2025 में इस योजना की घोषणा की थी। HSIIDC को जमीन खरीदने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन किसानों के विरोध ने इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

इसी बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 5 से 11 अक्टूबर तक जापान दौरे पर जा रहे हैं। वे जापानी निवेशकों से मुलाकात करेंगे और हरियाणा में उद्योगों के लिए उपलब्ध अवसरों को विस्तार से प्रस्तुत करेंगे। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि जापान से निवेश आकर्षित कर इस योजना को मजबूती मिलेगी।