IPS वाई पूरन कुमार केस पर सियासी तूफान, दिल्ली तक गूंजा जातीय भेदभाव का मुद्दा, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद राज्य प्रशासन और राजनीति में भूचाल आ गया है। सुसाइड नोट में जातीय भेदभाव और 15 अफसरों के नाम का जिक्र है। कांग्रेस ने BJP सरकार पर अन्याय का आरोप लगाया, जबकि SC लॉबी अफसर के परिवार के समर्थन में एकजुट हो गई है।
➤ IPS वाई पूरन कुमार सुसाइड केस ने हरियाणा से दिल्ली तक मचाई हलचल
➤ राहुल गांधी और खड़गे बोले – BJP राज में अन्याय चरम पर
➤ SC लॉबी हुई एकजुट, CM आवास पर HCS एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन
हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला अब राजनीतिक तूफान में बदल गया है। यह मामला अब सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि दिल्ली तक गूंज गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि BJP राज में अन्याय चरम पर पहुंच गया है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “BJP-RSS की नफरत और मनुवादी सोच ने समाज में विष भर दिया है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और मुस्लिम समाज न्याय की उम्मीद खो चुके हैं।”
हरियाणा के सीनियर IPS अफसर वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के तीसरे दिन आखिरकार चंडीगढ़ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। गुरुवार देर शाम सेक्टर-11 थाना में 156 नंबर FIR दर्ज की गई। यह मामला भारत न्याय संहिता (BNS) की धारा 108, 3(5) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत दर्ज हुआ है।
चंडीगढ़ पुलिस की एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि यह एफआईआर आईएएस अफसर अमनीत पी. कुमार, जो मृतक पूरन कुमार की पत्नी हैं, की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि शिकायत के साथ दिए गए सुसाइड नोट को आधार माना गया है, जिसमें आत्महत्या के लिए उकसाने और जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं।
कंवरदीप कौर ने कहा — “सुसाइड नोट में जिन अधिकारियों के नाम थे, उन्हें एफआईआर में आरोपी बनाया गया है। एफआईआर की कॉपी बहुत जल्द सार्वजनिक की जाएगी।”
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब हरियाणा के IPS, IAS, HCS और HPS अफसर दो गुटों में बंट गए हैं। हरियाणा सिविल सर्विस (EB) ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी पूरन कुमार के परिवार के समर्थन में खुलकर मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि सुसाइड नोट में दर्ज अफसरों के नाम पर FIR दर्ज की जाए और आरोपियों को पावरफुल पदों से हटाया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।
एसोसिएशन अध्यक्ष एचसीएस शंभू ने बताया कि पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सीएम आवास पर ज्ञापन सौंपा और मुख्यमंत्री ने न्याय का भरोसा दिलाया।
इस बीच मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बुधवार को पूरन कुमार की IAS पत्नी अमनीत पी कुमार से उनके चंडीगढ़ आवास पर मुलाकात की। उन्होंने कहा, “हमारा साथी अब हमारे बीच नहीं रहा, इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता।”
SC लॉबी एकजुट, चंडीगढ़ में हुई गुप्त बैठक
बुधवार शाम चंडीगढ़ के अंबेडकर भवन में SC वर्ग से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और समाज के लोगों की एक गुप्त बैठक हुई। इस बैठक में प्रिंसिपल सेक्रेटरी स्तर के एक IAS अधिकारी भी पहुंचे। यहां जातीय भेदभाव के मामलों पर चर्चा हुई और सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई गई।
इसी बीच सरकार में हलचल मच गई। डैमेज कंट्रोल के लिए मुख्य सचिव ने पूरन कुमार की पत्नी से बातचीत शुरू की। उन्होंने पोस्टमॉर्टम करवाने की अपील की, जिस पर अमनीत ने साफ कहा, “पहले सुसाइड नोट में नामित अफसरों पर FIR दर्ज करें, फिर मैं पोस्टमॉर्टम करवाने दूंगी।”
कुछ घंटे बाद अमनीत पी कुमार ने चंडीगढ़ सेक्टर-11 थाने में औपचारिक शिकायत दी, जिसमें डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया के नाम हैं।
सुसाइड नोट में 15 अफसरों के नाम और जातिगत भेदभाव का जिक्र
IPS पूरन कुमार के 8 पेज के सुसाइड नोट में जातीय उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। नोट में 15 मौजूदा और पूर्व अफसरों के नाम शामिल हैं। यह भी सामने आया कि उन्होंने पहले भी मुख्य सचिव तक भेदभाव की शिकायतें की थीं।
पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपनी कोठी में खुद को गोली मार ली थी। उन्होंने मरने से पहले सुसाइड नोट IAS पत्नी के मोबाइल पर भेजा, जो उस समय CM नायब सैनी के साथ जापान दौरे पर थीं। अमनीत के लौटने के बाद मामला सार्वजनिक हुआ और अफसरों में हलचल तेज हो गई।
IAS और IPS लॉबिंग के बीच सोशल मीडिया पर जंग
सुसाइड नोट में DGP का नाम आने के बाद, रोहतक के एक शराब कारोबारी का वीडियो वायरल हुआ। उसमें कारोबारी ने आरोप लगाया कि आईजी वाई पूरन कुमार का गनमैन सुशील कुमार उससे रिश्वत मांग रहा था और मानसिक दबाव डाल रहा था। 6 अक्टूबर को गनमैन का नाम आया और 7 अक्टूबर को वाई पूरन कुमार की मौत हो गई।
इसके बाद सोशल मीडिया ग्रुपों में अफसरों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिशें हुईं। कुछ पोस्टों में कहा गया कि भ्रष्टाचार केस में फंसने के डर से पूरन कुमार ने सुसाइड किया, जबकि परिवार और सहयोगी अफसर इसे जातिगत उत्पीड़न बता रहे हैं।
SC अफसरों की बैठक में तीन पुराने केसों का भी जिक्र हुआ –
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IAS डी सुरेश को एंटी करप्शन जांच का सामना करना पड़ा।
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विजय दहिया को गिरफ्तार कर बाद में बहाल किया गया।
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जयवीर आर्य पर भी करप्शन के आरोप लगे लेकिन सरकार ने मुकदमे की अनुमति देने से इनकार किया।
बैठक में कहा गया कि SC वर्ग के अफसरों को लगातार टारगेट किया जा रहा है और वाई पूरन कुमार का मामला भी उसी सिलसिले की कड़ी है।
HCS एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता और पारदर्शिता से निपटाया जाए। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि “आरोपी अफसरों को अस्थायी रूप से पद से हटाया जाए, ताकि जांच पर कोई प्रभाव न पड़े।”
Akhil Mahajan