हरियाणा CET करेक्शन पोर्टल इसी हफ्ते होगा शुरू, 12 लाख युवाओं की उम्मीदें कोर्ट फैसले पर टिकीं
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) इस हफ्ते CET करेक्शन पोर्टल खोलने जा रहा है। नॉर्मलाइजेशन फार्मूले पर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। 2 सितंबर को सुनवाई होगी, लाखों युवाओं की निगाहें कोर्ट और आयोग पर टिकीं।
➤ HSSC जल्द खोलेगा CET करेक्शन पोर्टल
➤ हाईकोर्ट में नॉर्मलाइजेशन फार्मूले पर सुनवाई
➤ लाखों अभ्यर्थियों के लिए अहम फैसला
हरियाणा कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) ग्रुप-C परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) इसी हफ्ते करेक्शन पोर्टल खोलने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 25 अगस्त को ही विधानसभा के मानसून सत्र में घोषणा की थी कि दो दिन के भीतर पोर्टल खोला जाएगा, हालांकि इसमें थोड़ी देरी हुई। आयोग के सूत्रों का कहना है कि 10 सितंबर से पहले यह पोर्टल शुरू करने की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि सीईटी-2025 परीक्षा का आयोजन 26 और 27 जुलाई को हुआ था, जिसमें प्रदेश और बाहर के 12 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया था। इस परीक्षा के लिए आयोग पहले ही 29 जुलाई को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर चुका है और 1 अगस्त तक आपत्तियां दर्ज कराने का समय भी दिया गया था। प्रति प्रश्न 250 रुपये शुल्क तय किया गया था।
HSSC चेयरमैन डॉ. हिम्मत सिंह पहले ही 8 अगस्त को सोशल मीडिया के माध्यम से अभ्यर्थियों को यह संदेश दे चुके थे कि अपने दस्तावेज और प्रमाण-पत्र तैयार रखें, जल्द ही करेक्शन पोर्टल खोला जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि आयोग कोशिश करेगा कि परीक्षा परिणाम एक माह के भीतर जारी कर दिए जाएं।
लेकिन इसी बीच भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। आयोग ने परीक्षा परिणाम में नॉर्मलाइजेशन फार्मूला लागू किया है, जिसे रोहतक निवासी पवन कुमार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस फार्मूले के चलते वास्तविक योग्यता प्रभावित हुई है और कई अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है।
हाईकोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए अर्जेंट कैटेगरी में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है। 2 सितंबर को जस्टिस संदीप मोदगिल की अदालत में इस पर सुनवाई होगी। चूंकि यह मामला लाखों युवाओं से जुड़ा है, इसलिए अदालत का निर्णय बेहद अहम साबित हो सकता है। अब अभ्यर्थियों की नजरें न सिर्फ करेक्शन पोर्टल के खुलने पर हैं, बल्कि हाईकोर्ट के फैसले पर भी टिकी हुई हैं, जो आगे की भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।