रेप-हत्याकांड में फांसी की सजा रद्द, हाईकोर्ट ने ट्रायल की खामियों पर उठाए सवाल, अब दोबारा होगी सुनवाई
झज्जर में 5 साल की बच्ची के रेप-हत्या केस में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा रद्द की। ट्रायल में फोरेंसिक खामियों के चलते अब दोबारा सुनवाई होगी।
- झज्जर बच्ची रेप-हत्याकांड में फांसी की सजा रद्द
- हाईकोर्ट ने ट्रायल में फोरेंसिक खामियां मानीं
- मामले में अब दोबारा होगी सुनवाई
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के झज्जर में 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी विनोद उर्फ मुन्ना को दी गई फांसी की सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि ट्रायल के दौरान फोरेंसिक साक्ष्यों से जुड़ी गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां रहीं।
जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल के समय डीएनए रिपोर्ट और अन्य अहम फोरेंसिक सबूत आरोपी के समक्ष स्पष्ट रूप से नहीं रखे गए। आरोपी को इन साक्ष्यों पर अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला, जिससे निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हुई।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने CRPC की धारा 313 के तहत आरोपी के सामने सभी आपराधिक परिस्थितियां नहीं रखीं। इसे कोर्ट ने ट्रायल को दूषित करने वाला करार दिया।
खंडपीठ ने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाना जितना जरूरी है, उतना ही आरोपी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा भी आवश्यक है। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए मामले को निचली अदालत को दोबारा सुनवाई के लिए भेजा जा रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब केस फिर से झज्जर की ट्रायल कोर्ट में चलेगा। इस दौरान फोरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट को आधिकारिक रिकॉर्ड पर लिया जाएगा और आरोपी को उन पर अपनी सफाई देने का पूरा मौका मिलेगा। इसके बाद ही सजा पर दोबारा फैसला होगा।
यह वारदात 21 दिसंबर 2020 को झज्जर के छावनी क्षेत्र में हुई थी। मामले का ट्रायल अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज की फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला। करीब 11 महीने में सुनवाई पूरी करते हुए 29 नवंबर 2021 को आरोपी को दोषी ठहराया गया था।
ट्रायल कोर्ट ने बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले में विनोद उर्फ मुन्ना को फांसी की सजा सुनाई थी। साथ ही पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 6 के तहत उम्रकैद और 1 लाख 85 हजार रुपए जुर्माने की सजा भी दी गई थी।
पुलिस जांच तत्कालीन DSP राहुल देव के नेतृत्व में हुई थी। करीब 12 गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को फांसी तक सजा सुनाई गई थी। आरोपी के खिलाफ पहले से हरियाणा और राजस्थान में लूट और हत्या समेत 8 केस दर्ज बताए गए हैं।
Akhil Mahajan