नायब सैनी के एक साल: क्यों उपलब्धियों से ज्यादा विवादों की चर्चा ?
हरियाणा में नायब सैनी सरकार के एक साल पूरे। सोनीपत की रैली रद्द होने से जश्न फीका। सरकार का दावा—48 वादे पूरे, पर विवादों और अंदरूनी मतभेदों ने डाला असर।
➤ हरियाणा में नायब सैनी सरकार के एक साल पूरे, रैली रद्द होने से फीका पड़ा जश्न
➤ तीन बड़े ऐलान करने की तैयारी में मुख्यमंत्री, शुक्रवार को पंचकूला में प्रेस वार्ता
➤ विवादों, मंत्रियों की नाराज़गी और सियासी असहजता में बीता एक साल का सफर
हरियाणा की नायब सैनी सरकार का साल चुनौतियों की सेज पर कटा। HAU हिंसा प्रकरण हो या मनीषा डेथ मिस्ट्री, IPS वाई पूरन और ASI संदीप लाठर सुसाइड केस ने नायब सरकार की अफसरशाही के प्रबंधन पर सवाल उठे। देश भर में यह प्रकरण चर्चा का विषय रहे और केंद्र में विपक्ष ने इन्हीं मुद्दों को भुनाने के कोई कसर नहीं छोड़ी।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि यही कारण है कि आज एक साल के जश्न में सोनीपत में भव्य रैली का आयोजन किया जाना था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना जताई गई थी। लेकिन पहले पीएम का कार्यक्रम रद्द हुआ और बाद में रैली भी स्थगित कर दी गई। इससे सरकार के जश्न का माहौल फीका पड़ गया। अब मुख्यमंत्री नायब सैनी इस अवसर पर तीन बड़े ऐलान करने की तैयारी में हैं और इसके लिए शुक्रवार को पंचकूला में प्रेस वार्ता करने जा रहे हैं।
बता दें कि विधानसभा चुनावों के बाद जारी संकल्प पत्र में भाजपा ने 240 वादे किए थे। सरकार ने 27 जनवरी 2025 को दावा किया कि इनमें से 18 वादे पूरे किए जा चुके हैं, जबकि अप्रैल 2025 तक यह संख्या बढ़ाकर 48 वादों के पूरा होने तक पहुंच गई।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, संकल्प पत्र के 20 प्रमुख वादों में से 4 पर ही ठोस प्रगति दिखाई दी है। इनमें दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना, महिलाओं को 2100 रुपए मासिक सहायता, शामलात भूमि पर मालिकाना हक, अग्निवीरों के लिए आरक्षण, और मुफ्त डायलिसिस सुविधा जैसी योजनाएं शामिल हैं।
ऐसे में सैनी सरकार का यह एक साल विकास योजनाओं, सामाजिक वर्गों के संतुलन और राजनीतिक असहजता के बीच बीता। योजनाएँ जमीन पर उतरीं, लेकिन प्रशासनिक स्थिरता और पार्टी एकजुटता को लेकर कई सवाल उठे। IPS और ASI के मामलों ने सरकार की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए। अब देखना यह होगा कि शुक्रवार को सीएम नायब सैनी जो तीन बड़े ऐलान करने जा रहे हैं, क्या वे सरकार के इस फीके जश्न में नई चमक ला पाएंगे या नहीं।
सरकार की 6 प्रमुख उपलब्धियां
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अनुसूचित जाति में कोटे के अंदर कोटा: सरकार ने नौकरियों में 20% एससी आरक्षण को दो हिस्सों में बांटते हुए वंचित जातियों के लिए अलग 10% आरक्षण लागू किया।
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लाडो लक्ष्मी योजना: 25 सितंबर से शुरू इस योजना के तहत एक नवंबर से 1 लाख रुपए वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को 2100 रुपए मासिक दिए जाएंगे।
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मुफ्त डायलिसिस सुविधा: हरियाणा के 10 जिलों में 112 मशीनों पर 24 घंटे डायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई गई।
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हिसार एयरपोर्ट की उड़ानें: हिसार से दिल्ली, जयपुर, अयोध्या और चंडीगढ़ के लिए उड़ानें शुरू।
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शामलात भूमि का मालिकाना हक: 2004 से पहले से काबिज परिवारों को पंचायती भूमि का मालिकाना हक देने का निर्णय।
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अग्निवीर आरक्षण: राज्य की पुलिस नौकरियों में अग्निवीरों के लिए आरक्षण 10% से बढ़ाकर 20% किया गया।
वो 4 विवाद जिनसे सरकार रही असहज
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HAU हिंसा प्रकरण: छात्रवृत्ति नीति में बदलाव को लेकर हुए विरोध में छात्रों पर लाठीचार्ज ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया।
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मनीषा डेथ मिस्ट्री: 19 वर्षीय टीचर की रहस्यमयी मौत ने प्रदेशभर में विरोध की लहर खड़ी की, जिसके बाद मामला CBI को सौंपा गया।
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IPS वाई पूरन सुसाइड केस: वरिष्ठ अधिकारी की आत्महत्या और उसके लास्ट नोट से मामला जातीय रंग में बदल गया, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा।
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ASI संदीप लाठर सुसाइड: इस घटना में सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, परन्तु IPS पूरन की पत्नी व IAS अफसर अमनीत पी. कुमार पर केस दर्ज होने से विवाद और बढ़ा।
मंत्री अनिल विज के बयान और अंदरूनी खींचतान
बीते एक साल में सरकार को जितनी चुनौतियाँ विपक्ष से नहीं मिलीं, उतनी भीतर से मिलीं। कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने बार-बार सरकार पर निशाना साधा। कभी सीएम की फोटो पर “गद्दार का ठप्पा” लगाया, तो कभी प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बडौली के इस्तीफे की मांग की। विज ने आरोप लगाया कि चुनाव में उन्हें हरवाने की कोशिश की गई और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो “आमरण अनशन” करेंगे।
सितंबर 2025 में विज ने अपने X (Twitter) हैंडल से “मिनिस्टर” शब्द हटाकर संकेत दिए कि वे नाराज हैं। तब केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर को खुद उन्हें मनाने उनके घर तक जाना पड़ा।
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