राहुल गांधी का बड़ा दावा: वोट-चोरी के प्रमाण, आने वाला है ‘हाइड्रोजन बम’
राहुल गांधी ने वोट-चोरी के संबंध में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए 'हाइड्रोजन बम' खुलासे का दावा किया। कांग्रेस 48 सीटों पर कथित गड़बड़ी का हवाला दे रही है; भाजपा ने पलटवार किया है। राजनीतिक पहचान और कानूनी जाँच की अहमियत बढ़ी है।
➤ राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए
➤ ‘हाइड्रोजन बम’ खुलासों का दावा, समय और जगह को लेकर सस्पेंस कायम
➤ भाजपा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी; राजनीतिक तापमान बढ़ा
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने बिहार चुनावों और अन्य स्थानों पर कथित वोट-चोरी के मसले को लेकर एक बार फिर तेज हमला बोला है। मंगलवार-बुधवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस/लाइव बैठकों में उन्होंने चुनाव आयोग और विशेषकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास वोट एडिट और डिलीट होने के “100% सबूत” मौजूद हैं और वह बड़े-बड़े खुलासे (कांग्रेस की भाषा में ‘हाइड्रोजन बम’) कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे लोकतंत्र और संविधान के रक्षक हैं और जब संस्थान (जैसे चुनाव आयोग) अपने दायित्व निभाने में विफल रहे तो वे सबूत जनता के सामने रखेंगे। उन्होंने दावा किया कि कुछ संस्थानों के भीतर से भी कांग्रेस को मदद मिलनी शुरू हो गई है और उन्होंने चुनाव आयोग के साथ सरकार-स्तरीय समझौतों पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक जो उन्होंने बताया उसे उन्होंने ‘एटम बम’ बताया था, अब ‘हाइड्रोजन बम’ आने वाला है — यानी और भी बड़े खुलासे होंगे।
कांग्रेस का जोर है कि देशभर में कम-से-कम 48 सीटें ऐसी हैं जहाँ पार्टी का मानना है कि हार वोट-चोरी के कारण हुई है; इनमें कथित तौर पर वाराणसी जैसी अहम सीटें भी शामिल हैं। राहुल की टीम ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणामों और बिहार में वोट-चोरी के अल alleged पैटर्न पर भी अध्ययन का हवाला दिया है और कहा जा रहा है कि हरियाणा से भी कोई बड़ा खुलासा हो सकता है।
भाजपा-केंद्रित प्रतिक्रियाएँ: राहुल के आरोपों पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश व केन्द्र दोनों स्तरों के कई नेताओं ने राहुल पर निराधार आरोप लगाने और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता मनजिंदर सिरसा और अन्य ने राहुल के दावों को राजनीति से प्रेरित करार दिया और कहा कि यदि कांग्रेस के वोट ही काटे जा रहे होते तो कई राज्य-सरकारें और सीटें कैसे बनीं। पार्टी के समर्थक सोशल मीडिया पर भी राहुल के दावों पर सवाल उठा रहे हैं।
कानूनी और राजनीतिक परिदृश्य: राहुल के दावों में यदि साक्ष्य सार्वजनिक किए जाते हैं तो चुनावी और कानूनी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं — चुनाव आयोग, न्यायपालिका और पुलिस से जुड़े संकेतकों की ओर ध्यान जाएगा। दूसरी ओर, विपक्षी दलों और तटस्थ पर्यवेक्षकों का कहना है कि ऐसे गंभीर आरोपों के साथ स्पष्ट, प्रामाणिक और फॉरेंसिक-लेवल सबूत होना जरूरी है; बिना ठोस सबूत के केवल आरोप-प्रचार से स्थिति और ध्रुवीकृत हो सकती है।
राहुल ने कहा कि वह फिलहाल यह साफ़ कर रहे हैं कि सबूत हैं और reveal का वक्त आने पर वह सब कुछ बताएंगे; साथ ही उन्होंने यह तवज्जो भी दी कि वे कोर्ट और कानूनी संस्थाओं पर भरोसा रखते हैं। कांग्रेस की ओर से सोशल-मीडिया पर और मैदान पर प्रचार-उपक्रम भी तेज कर दिए गए हैं। राजनीतिक दलों के भीतर इस बयान-बाजी ने चुनावी सरगर्मी और आरोप-प्रत्यारोप को और बढ़ा दिया है।
Akhil Mahajan