एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कबड्डी में मारी बाज़ी
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की पुरुष कबड्डी टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय चैंपियनशिप जीतकर पांच वर्षों में चौथी बार इतिहास रचा। तीन खिलाड़ी चयनित आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी के लिए।
➤ एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की पुरुष कबड्डी टीम बनी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय चैंपियन
➤ पांच वर्षों में चौथी बार जीत दर्ज कर कॉलेज ने रचा इतिहास
➤ तीन खिलाड़ी चयनित आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के लिए
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की पुरुष कबड्डी टीम ने हाल ही में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पुरुष कबड्डी चैंपियनशिप जीतकर कॉलेज और जिले का गौरव बढ़ाया। इस जीत के साथ टीम ने पांच वर्षों में चौथी बार विश्वविद्यालय चैंपियनशिप पर कब्जा कर इतिहास रच दिया। टूर्नामेंट में एसडी पीजी कॉलेज ने जोन और इंटरजोन की विजेता टीमों को हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। लीग मैचों में आर्य कॉलेज पानीपत को 29-24, राजकीय महाविद्यालय इसराना को 33-32, जाट कॉलेज कैथल को 47-27 और नॉक आउट मैच में खालसा कॉलेज यमुनानगर को 35-10 के अंतर से हराकर फाइनल में जीत सुनिश्चित की।
विजेता खिलाड़ियों का स्वागत कॉलेज प्रांगण में प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा, कोच अंकुश मलिक, कोच सुरेश और ग्राउंड्समैन प्रताप ने किया। कप्तान अभिषेक की अगुआई में लक्ष्य, मंजीत और अन्य खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को चारों ओर से विजयी बनाया। सबसे बड़ी खुशी की बात यह रही कि तीन खिलाड़ियों का चयन आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के लिए हुआ।
दिनेश गोयल ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के लिए गर्व का विषय है। खेल न केवल शारीरिक ताकत बढ़ाते हैं बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर भाग लेना और चैंपियन बनना प्रेरणादायक है। प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने बताया कि कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धियां हासिल करना बेहद कम खिलाड़ियों को ही नसीब होती हैं। कबड्डी खेलना युवाओं में सामाजिकता, टीमवर्क, शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देता है।
शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल ने कहा कि कबड्डी एक भारतीय मैदानी खेल है, जिसमें दो ही पाले पर्याप्त होते हैं। यह खेल युवाओं में ऊर्जा, कौशल और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भरता है। पकड़ने और बचाव करने वाले खिलाड़ियों की शारीरिक तंदुरुस्ती और मानसिक दृढ़ता इस खेल से विकसित होती है।
Akhil Mahajan