हरियाणा की इस शिक्षिका को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, 14 हजार बच्चों को फर्स्ट सिखा किया कमाल

सोनीपत की शिक्षिका सुनीता ढुल को राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने शिक्षा के साथ 14 हजार बच्चों को फर्स्ट एड और जीवन रक्षक कौशल सिखाकर मिसाल कायम की है।

हरियाणा की इस शिक्षिका को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, 14 हजार बच्चों को फर्स्ट सिखा किया कमाल


सोनीपत की सुनीता ढुल को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार
➤ करीब 14 हजार बच्चों को फर्स्ट एड और जीवन रक्षक कौशल सिखाए
➤ पिता की सोच और मां के समर्पण ने बनाई शिक्षा की राह



हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव नसीरपुर की रहने वाली शिक्षिका सुनीता ढुल को शुक्रवार को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में होने वाले समारोह में यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय योगदान और समाज को नई दिशा देने के प्रयासों के लिए मिल रहा है। इस वर्ष हरियाणा से राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली वह इकलौती शिक्षिका हैं।

वर्तमान में सुनीता ढुल पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, मुरथल अड्डा में सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ाती हैं। एक शिक्षिका के साथ-साथ वे रेडक्रॉस की राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर भी हैं। अब तक वे लगभग 14,000 से अधिक बच्चों को फर्स्ट एड और जीवन रक्षक कौशल का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। इसके अलावा वे पिछले डेढ़ साल से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान भी चला रही हैं, जिसमें बच्चों को पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करती हैं।

उनकी सफलता के पीछे परिवार की प्रेरणा और संघर्षों की कहानी भी छिपी है। पिता राज सिंह दहिया सेना से रिटायर होने के बाद बिजली निगम में कार्यरत रहे। उस समय ग्रामीण समाज में बेटियों की पढ़ाई को महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन उन्होंने समाज की परवाह न करते हुए बेटियों को पढ़ाया और यह विश्वास जगाया कि “बेटियां बदलाव की सोच लेकर समाज को दिशा दे सकती हैं।” मां सुखदेई रोज सुबह 3 बजे उठकर बच्चों को पढ़ने के लिए जगाती थीं।

सुनीता ढुल ने पढ़ाई के साथ ट्यूशन पढ़ाकर आगे की पढ़ाई का खर्च उठाया। वे बीएड एंट्रेंस परीक्षा की तीसरी टॉपर रहीं और 1996 से लेकर 2013 तक निजी संस्थानों में शिक्षिका और प्रिंसिपल के तौर पर कार्य किया। 2014 में उन्हें सरकारी सेवा मिली।

बतौर शिक्षिका उन्होंने बच्चों के लिए टाइम टेबल का महत्व, स्टूडेंट कमेटी का गठन, व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी उपयोग और सामाजिक-नैतिक मूल्यों पर खास जोर दिया। कोविड के दौरान उनकी बनाई भूगोल की वीडियो क्लासेज पूरे हरियाणा में एजुसेट चैनल पर चलाई गईं।

शुरुआती दिनों में वे सख्त टीचर के रूप में पहचानी जाती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने संवाद और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया। सुनीता का मानना है कि शिक्षा सिर्फ पेशा नहीं बल्कि समाज में बदलाव का माध्यम है।

आज उनकी 29 साल की मेहनत और समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है। सुनीता कहती हैं—“राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार सिर्फ मेरा सम्मान नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है, जिसने बेटियों को बोझ नहीं बल्कि समाज की शक्ति माना।