बरवाला, अंबाला सदर और बहादुरगढ़ को मिला नगर परिषद का तोहफा, हरियाणा सरकार ने जारी की गजट अधिसूचना

बरवाला, अंबाला सदर और बहादुरगढ़ को नगर समिति से नगर परिषद में अपग्रेड कर दिया है, जो हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के तहत एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव है। सरकार ने इस पर आम जनता से 30 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

बरवाला, अंबाला सदर और बहादुरगढ़ को मिला नगर परिषद का तोहफा, हरियाणा सरकार ने जारी की गजट अधिसूचना

  • बरवाला, अंबाला सदर, बहादुरगढ़ अब नगर परिषद

  • शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जारी की अधिसूचना

हरियाणा सरकार ने  बरवाला, अंबाला सदर, और बहादुरगढ़ को नगर परिषद का दर्जा प्रदान कर दिया है। यह फैसला हरियाणा के नागरिकों के लिए मूलभूत सुविधाओं और बेहतर स्थानीय शासन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, क्योंकि नगर परिषद का दर्जा मिलने से इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

यह अधिसूचना दिनांक 31 अक्टूबर, 2025 को जारी की गई है और इसमें स्पष्ट किया गया है कि यह परिवर्तन हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धारा 2(ट) की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया गया है। इन तीनों स्थानों को अब नगर समिति (Municipal Committee) के बजाय नगर परिषद (Municipal Council) के रूप में पुनर्गठित किया गया है। इस पुनर्गठन का सीधा अर्थ है कि इन क्षेत्रों का प्रशासनिक ढांचा बड़ा हो जाएगा और शहरीकरण की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक संसाधन और शक्तियां उपलब्ध होंगी।

अधिसूचना में सरकार ने पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पूरा ध्यान रखा है। इसके अनुसार, इस प्रशासनिक बदलाव से प्रभावित होने वाले या रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति को अपने सुझाव या आपत्तियां प्रस्तुत करने का अधिकार दिया गया है। आम जनता इस अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर अपनी राय सरकार या संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग, चंडीगढ़ द्वारा मांगे गए ये सुझाव और आपत्तियां निर्धारित प्रारूप में दी जानी आवश्यक हैं, ताकि उन पर विचार करके अंतिम निर्णय लिया जा सके।

इस निर्णय के तहत, अधिनियम, 1973 में निहित अनुसूची को संशोधित किया गया है और नई अनुसूची में क्रम संख्या 1 पर अंबाला सदर, क्रम संख्या 2 पर बरवाला, और क्रम संख्या 3 पर बहादुरगढ़ को नगर परिषद के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि नगर परिषद का दर्जा मिलने से इन शहरों को न केवल अधिक बजट आवंटन मिलेगा, बल्कि बेहतर नागरिक सेवाएं, ठोस कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और सड़क नेटवर्क के सुधार में भी तेजी आएगी। यह कदम इन तीनों क्षेत्रों के निवासियों के लिए एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।