हरियाणा, चंडीगढ़-पंचकूला:
चंडीगढ़ पुलिस ने हरियाणा के पंचकूला से फर्जी मेजर गणेश भट्ट को गिरफ्तार किया, जो पिछले 8 साल से खुद को आर्मी अफसर बताकर ठगी कर रहा था। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि भट्ट वास्तव में BA फेल है और सेना की वर्दी पहनकर लड़कियों को प्रभावित करता और अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर तीन राज्यों—उत्तराखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश—में 50 से 60 लाख रुपए की ठगी करता रहा।

गणेश भट्ट उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पसदेव पट्टीगवाड़ी गांव के हैं। उनके पिता जगदीश चंद्र भट्ट सूबेदार रहे हैं। पिता की सेना में नौकरी की वजह से गणेश को सैन्य जीवन की जानकारी थी। हालांकि पढ़ाई में रुचि न होने और गलत संगत में पड़ने के कारण उन्होंने BA सेकेंड ईयर में पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद भट्ट ने 2018 के आसपास सेना की वर्दी पहनकर खुद को मेजर बताना शुरू किया और भरोसा करने वाले लोगों से पैसे ठगने लगा।

भट्ट युवाओं को सेना में भर्ती कराने का झांसा देता था। सबसे पहले उसने देहरादून में कुछ युवाओं को फंसाया और पैसे लेकर मामले को समझौते के जरिए खारिज करवा लिया। पंचकूला में चंडी मंदिर आर्मी कैंप में फर्जी आई कार्ड दिखाकर प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे पकड़ा गया। उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी उसने अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर युवाओं से पैसे लिए, लेकिन भर्ती नहीं करवाई। 19 अप्रैल 2023 को मिलिट्री इंटेलिजेंस ने मेरठ में उसे आर्मी वर्दी और अन्य सामान के साथ पकड़ा।
भट्ट ने लड़कियों को प्रभावित करने के लिए भी सेना के अफसरों के साथ अपने लिंक दिखाने का नाटक किया। उसने कई नेताओं और पूर्व डीजीपी के साथ तस्वीरें खिंचवाई और लड़कियों को वीडियो कॉल पर धोखा दिया।
महिला कॉन्स्टेबल से ठगी
चंडीगढ़ पुलिस के क्राइम ब्रांच में तैनात एक लेडी कॉन्स्टेबल भी उसके जाल में फंस गई। भट्ट ने शादी का झांसा देकर ₹5 लाख और सोने की अंगूठी ठग ली। इसी शिकायत पर भट्ट को 22 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।
भट्ट ने चंडीगढ़ में कुछ पुलिस अफसरों से दोस्ती कर ली थी और अक्सर क्राइम ब्रांच में टी-लंच के दौरान अफसरों के साथ मिलता-जुलता रहा। इससे उसकी रुतबा बढ़ा और वह पुलिस के बीच पहचान बना पाया। हालांकि, जब एसपी (क्राइम) जसबीर सिंह और डीएसपी धीरज कुमार ने जांच शुरू की, तब भट्ट का असली चेहरा सामने आया।
भट्ट के वकील ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया। मेडिकल जांच में कान, आंख, हाथ-पैर और गाल पर चोट और शरीर पर निशान पाए गए।
22 अगस्त को गिरफ्तारी के बाद भट्ट को रिमांड पर लेने की क्राइम ब्रांच की अर्जी खारिज हो गई। 17 सितंबर को कोर्ट ने उसे ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा। गुरुवार को उसकी बेल एप्लिकेशन खारिज कर दी गई।
ऑपरेशन सेल की कार्रवाई
अब मामला क्राइम ब्रांच से ऑपरेशन सेल को ट्रांसफर कर दिया गया। राजस्थान जयपुर से भट्ट की आर्मी वर्दी और गुरुग्राम से मोबाइल बरामद कर लिए गए हैं। मामले की जांच जारी है कि क्या कोई पुलिस अफसर भट्ट के साथ मिलीभगत में था या नहीं।
गणेश भट्ट का मामला यह दिखाता है कि कैसे सेना के रुतबे और वर्दी का जाल युवाओं और महिलाओं को फंसाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके पीछे कई स्तरों पर जांच की जरूरत होती है।