Side Story: डीजीपी चयन में सीनियॉरिटी क्यों नहीं चली, जानें

हरियाणा में नए डीजीपी की नियुक्ति के पीछे की पूरी कहानी। सीनियॉरिटी में आगे होने के बावजूद शत्रुजीत कपूर क्यों बाहर हुए और कैसे अजय सिंघल बने डीजीपी।

Side Story: डीजीपी चयन में सीनियॉरिटी क्यों नहीं चली, जानें
  • सीनियॉरिटी में आगे होने के बावजूद शत्रुजीत कपूर को नहीं मिला डीजीपी पद
  • वाई पूरन कुमार सुसाइड केस बना बड़ा कारण
  • अजय सिंघल शुरू से ही डीजीपी रेस में फ्रंट रनर माने जा रहे थे


हरियाणा को नए साल की पूर्व संध्या पर नया डीजीपी तो मिल गया, लेकिन इसके पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग की पैनल कमेटी ने डीजीपी पद के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार किया था। इस पैनल में सीनियॉरिटी के आधार पर पूर्व डीजीपी शत्रुजीत कपूर सबसे आगे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें डीजीपी बनने का लाभ नहीं मिल सका।

शत्रुजीत कपूर का नाम दिवंगत आईपीएस वाई पूरन कुमार के सुसाइड केस में सामने आने के बाद उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी। सुसाइड नोट में नाम आने के बाद सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेज दिया था। इसके बाद उन्हें डीजीपी पद से भी हटा दिया गया, जिससे उनकी दावेदारी लगभग समाप्त मानी जाने लगी।

कपूर के हटने के बाद ओपी सिंह को कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि ओपी सिंह सेवा की अधिकतम आयु पूरी होने के कारण 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए। इसी वजह से नए स्थायी डीजीपी की नियुक्ति जरूरी हो गई थी।

यूपीएससी की ओर से हरियाणा सरकार को जो पैनल भेजा गया, उसमें तीन नाम शामिल थे। पहले नंबर पर शत्रुजीत कपूर का नाम था, जबकि दूसरे नंबर पर 1992 बैच के आईपीएस अजय सिंघल और तीसरे नंबर पर 1993 बैच के आईपीएस आलोक मित्तल का नाम शामिल था। हालांकि सरकार ने अंतिम निर्णय लेते हुए अजय सिंघल के नाम पर मुहर लगा दी।

अजय सिंघल पूर्व डीजीपी शत्रुजीत कपूर के बाद सबसे सीनियर आईपीएस अधिकारी माने जाते हैं। वे एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख पद पर तैनात रहे हैं और ग्राउंड पुलिसिंग के साथ-साथ प्रशासनिक अनुभव के लिए पहचाने जाते हैं। उनका नाम लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर की गुड लिस्ट में शामिल बताया जाता रहा है।

इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नेताओं में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। यही वजह रही कि डीजीपी चयन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अजय सिंघल को इस रेस का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। अंततः सरकार ने सीनियॉरिटी से आगे बढ़कर अनुभव, छवि और परिस्थितियों को देखते हुए अजय सिंघल को हरियाणा पुलिस की कमान सौंप दी।