PS वाई पूरन कुमार सुसाइड केस की जांच CBI को नहीं जाएगी, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
हरियाणा IPS पूरन कुमार सुसाइड केस में हाईकोर्ट ने CBI जांच की मांग वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा—चंडीगढ़ पुलिस की SIT जांच संतोषजनक है।
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आईपीएस वाई पूरन कुमार सुसाइड केस की जांच अब CBI को नहीं सौंपी जाएगी
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा—चंडीगढ़ पुलिस की जांच संतोषजनक
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कोर्ट ने माना—SIT की जांच में लापरवाही या पक्षपात का कोई सबूत नहीं
चंडीगढ़। हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार सुसाइड मामले में CBI जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस की जांच संतोषजनक है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई या पक्षपात नहीं दिखता।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजेव बेरी की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ पुलिस की जांच पर संदेह करने का कोई ठोस आधार नहीं है।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित झांजी ने अदालत को बताया कि इस मामले में 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है। कई अहम सबूत जब्त किए गए हैं और उन्हें एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 10 अक्टूबर 2025 को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई थी, जिसकी अगुवाई चंडीगढ़ के आईजी कर रहे हैं।
अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह प्रतीत होता है कि जांच समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है। इसलिए मामले को किसी स्वतंत्र एजेंसी या CBI को देने की आवश्यकता नहीं है।
इस मामले में याचिका हरियाणा के एक एनजीओ अध्यक्ष नवीन कुमार ने दाखिल की थी। उन्होंने कहा था कि यह जांच निष्पक्ष नहीं है, क्योंकि चंडीगढ़ पुलिस अपने प्रशासनिक दायरे से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं कर सकती। याचिका में दावा किया गया कि आईपीएस अधिकारी की संदिग्ध मौत से जनता का भरोसा कमजोर हुआ है और यह सिस्टम के भीतर साजिश का संकेत देती है।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि अधिकारी द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट्स में कई IPS और IAS अधिकारियों के नाम दर्ज हैं और यह मामला जातीय उत्पीड़न व आत्महत्या के लिए उकसावे की ओर इशारा करता है। हालांकि, कोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि जांच एजेंसी की अब तक की कार्रवाई में किसी तरह की पक्षपातपूर्ण प्रवृत्ति या देरी नहीं दिखती।
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