हरियाणा पुलिस फोरेंसिक लैब में होंगी भर्तियां , जानें

हरियाणा पुलिस फोरेंसिक लैब में 64 नए पदों पर भर्ती करेगी। डीएनए डिवीजन, मोबाइल यूनिट्स और आधुनिक उपकरणों से जांच तेज, रिपोर्ट 30 दिन में देने का लक्ष्य।

हरियाणा पुलिस फोरेंसिक लैब में होंगी  भर्तियां , जानें
  • हरियाणा पुलिस फोरेंसिक लैब में 64 नए पदों पर करेगी भर्ती
  • एफएसएल और आरएफएसएल के लिए 86.38 करोड़ के आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे
  • हर फोरेंसिक रिपोर्ट 30 दिन में देने का लक्ष्य तय

 हरियाणा पुलिस ने नए साल में फोरेंसिक सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने फोरेंसिक लैब में 64 नए पदों पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया है। नए साल के लक्ष्य तय करते हुए डीजीपी ने एफएसएल, आरएफएसएल और जिला फोरेंसिक इकाइयों के सशक्तिकरण का पूरा रोडमैप बनाया है।

इस योजना के तहत 86.38 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक फोरेंसिक उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके साथ ही हिसार और पंचकूला में नए डीएनए डिवीजन स्थापित किए जाएंगे। वहीं भोंडसी और हिसार स्थित आरएफएसएल भवनों के विस्तार के लिए स्वीकृत 32.58 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग तेजी से किया जाएगा।

डीजीपी अजय सिंघल ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य है कि सभी प्रकार की फोरेंसिक रिपोर्ट अधिकतम 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए। इससे आपराधिक मामलों की जांच में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।

प्रदेश में फोरेंसिक सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा मानव संसाधन विस्तार किया है। कुल 243 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 97 पदों पर नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों के जुड़ने से जांच की गति बढ़ी है और रिपोर्ट अधिक सटीक व वैज्ञानिक बन रही हैं।

एफएसएल मधुबन के डीएनए डिवीजन को अपग्रेड किया गया है और आरएफएसएल गुरुग्राम में नया डीएनए डिवीजन स्थापित किया गया है। इससे डीएनए परीक्षण की क्षमता पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। वहीं हिसार में बैलिस्टिक और दस्तावेज परीक्षण की नई प्रयोगशालाएं शुरू होने से क्षेत्रीय स्तर पर ही वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध होने लगी है।

भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार अब अपराध स्थल पर 100 प्रतिशत फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। इससे शुरुआती जांच अधिक मजबूत, प्रमाणिक और तकनीकी रूप से सटीक हो रही है।

क्राइम स्पॉट पर तुरंत वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में 17 नई मोबाइल फोरेंसिक यूनिट्स को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही 10 नई जिला फोरेंसिक लैब भी शुरू की गई हैं। राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय से प्राप्त चार आधुनिक मोबाइल फोरेंसिक वैन को भी उपयोग में लाया जा रहा है।

इन मोबाइल वैन के कस्टमाइजेशन के लिए 6.71 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिससे ये जटिल अपराध स्थलों पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक जांच में सक्षम हो गई हैं। इसके चलते हरियाणा देश के उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां सबसे मजबूत फोरेंसिक फील्ड-रिस्पॉन्स नेटवर्क मौजूद है।

साल 2025-26 में 15.83 करोड़ रुपए के आधुनिक फोरेंसिक उपकरण लगाए गए हैं। इसके अलावा 3 करोड़ रुपए के उपकरणों के ऑर्डर जारी हो चुके हैं और 57.95 करोड़ रुपए से अधिक के उपकरणों की खरीद प्रक्रिया जारी है। ट्रेकिया पोर्टल के माध्यम से फोरेंसिक प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है, जिससे केस ट्रैकिंग, रिपोर्ट तैयार करने और समीक्षा प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है।