हरियाणा BJP विधायक को सुप्रीम कोर्ट से झटका: याचिका खारिज, जिसमें रिकाउंटिंग न कराने की मांग की थी
हरियाणा की उचाना विधानसभा सीट पर BJP विधायक देवेंद्र अत्री को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। रिकाउंटिंग रोकने की याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी।
➤ सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र अत्री की स्पेशल लीव पिटीशन खारिज की
➤ 32 वोटों से हार-जीत वाले उचाना चुनाव में अब हाईकोर्ट करेगा आगे सुनवाई
➤ 215 कैंसिल वोट और 150 पोस्टल बैलेट बने पूरे विवाद की जड़
हरियाणा के जींद जिले की उचाना विधानसभा सीट से भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने वोटों की दोबारा गिनती यानी रिकाउंटिंग पर रोक लगाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट इस मामले में स्वतंत्र रूप से आगे की सुनवाई और निर्णय के लिए अधिकृत हो गया है।
दरअसल, वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उचाना सीट पर भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री ने कांग्रेस उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह को महज 32 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया था। इस करीबी मुकाबले के बाद वोटों की गिनती को लेकर सवाल खड़े हुए और कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रिकाउंटिंग की मांग की थी।
इस हाईकोर्ट याचिका के खिलाफ देवेंद्र अत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने स्पेशल लीव पिटीशन के जरिए हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने और दोबारा गिनती न कराने की अपील की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।
उचाना विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री को 48,968 वोट, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को 48,936 वोट मिले थे। कुल अंतर सिर्फ 32 वोटों का रहा। इस चुनाव में करीब 600 पोस्टल और बैलेट पेपर की गिनती हुई थी, जिनमें से 215 वोट त्रुटियों के कारण रिजेक्ट या कैंसिल कर दिए गए थे। यही आंकड़े पूरे विवाद की मुख्य वजह बने।
कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह का आरोप है कि जिन कैंसिल वोटों की संख्या हार-जीत के अंतर से कहीं ज्यादा थी, उनकी सही प्रक्रिया के तहत जांच नहीं की गई। उन्होंने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि नियमों के अनुसार यदि रिजेक्ट वोटों की संख्या जीत-हार के अंतर से अधिक हो, तो रिटर्निंग ऑफिसर को मौके पर दोबारा उनकी जांच करनी होती है, जो इस मामले में नहीं की गई।
बृजेंद्र सिंह ने यह भी दावा किया था कि करीब 150 पोस्टल बैलेट सिर्फ इसलिए कैंसिल कर दिए गए क्योंकि लिफाफों पर लगे स्कैनर उन्हें पढ़ नहीं पा रहे थे। जबकि नियमों में यह स्पष्ट है कि यदि स्कैनिंग न हो, तो उन लिफाफों को खोलने और जांचने की अलग प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, जो काउंटिंग के दौरान नहीं की गई।
इस मामले की सुनवाई जुलाई 2025 में हाईकोर्ट में शुरू हुई थी। उस दौरान देवेंद्र अत्री के वकील ने याचिका पर सवाल उठाए थे, लेकिन कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सुनवाई जारी रखी। सितंबर 2025 में अत्री की ओर से बृजेंद्र सिंह की याचिका खारिज करने की मांग की गई, जिस पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
इसके बाद हाईकोर्ट ने देवेंद्र अत्री की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने रिकाउंटिंग रोकने की अपील की थी। कोर्ट ने मामले के मुद्दे फ्रेम किए और 23 सितंबर को हुई सुनवाई में रिटर्निंग ऑफिसर को तलब किया गया। इसी सुनवाई में बृजेंद्र सिंह ने दोहराया कि 150 पोस्टल बैलेट लिफाफे खोले ही नहीं गए।
अब फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा देवेंद्र अत्री की स्पेशल लीव पिटीशन खारिज किए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि मामला फिर से हाईकोर्ट के पाले में लौट चुका है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि उचाना विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम यथावत रहेगा या वोटों की दोबारा गिनती का रास्ता खुलेगा।
Akhil Mahajan