हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ का असर कम, सुबह हल्की धुंध और ठंड की दस्तक

हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ का असर कम हुआ है। सोनीपत, पानीपत और करनाल में हल्की धुंध देखी गई। 12 जिलों की मंडियों में बारिश से धान भीग गया है। मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी हवाओं से रातें ठंडी होंगी और दिवाली के बाद दिन में भी ठंड महसूस होगी।

हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ का असर कम, सुबह हल्की धुंध और ठंड की दस्तक

हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ का असर कम, सुबह हल्की धुंध और ठंड की दस्तक
राज्य में 12 जिलों की मंडियों में बारिश से धान भीगा, खरीदी पर असर
8 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिमी हवा चलने से रात्रि तापमान में गिरावट संभव


हरियाणा में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। बुधवार सुबह सोनीपत, पानीपत और करनाल में हल्की धुंध देखने को मिली, जिससे लोगों को ठंडक का एहसास हुआ। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, पिछले दो दिनों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। हालांकि पहाड़ों पर हुई बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी देखा जा रहा है। सुबह और शाम के समय अब ठंड का अहसास बढ़ने लगा है

मौसम विभाग ने बताया कि 8 और 9 अक्टूबर को मौसम साफ या आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। हालांकि दिन का तापमान 1.2 डिग्री बढ़ा है, लेकिन यह अब भी सामान्य से 8.3 डिग्री कम बना हुआ है। पलवल में अधिकतम तापमान 32 डिग्री दर्ज हुआ, जबकि नारनौल में सबसे कम 22 डिग्री रहा। नूंह में रात का तापमान 16.9 डिग्री तक गिर गया।

हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि हालिया बारिश और वातावरण में नमी के कारण ठंड बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अब जब मौसम साफ होगा और हवा चलेगी तो तापमान में हल्की बढ़ोतरी होगी, लेकिन यह सामान्य सीमा के आसपास ही रहेगा। 8 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने लगेंगी, जिससे रात्रि तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।

खीचड़ ने यह भी कहा कि सुबह और शाम के समय हल्की ठंड का एहसास रहेगा और दिवाली के बाद दिन में भी ठंड महसूस होगी

राज्य की मंडियों में बारिश का असर भी दिखा है। बीते 24 घंटे में 15.3 मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि 1 से 7 अक्टूबर के बीच 22.6 मिमी. बारिश हुई है — जो कि सामान्य से 546% अधिक है। इस बारिश ने 12 जिलों — पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, हिसार (हांसी) और सिरसा की मंडियों में रखे धान को भीगने पर मजबूर कर दिया

कई मंडियों में धान को ढकने के इंतजाम पूरे नहीं थे, जिससे खरीदे गए धान की उठान प्रक्रिया पर भी असर पड़ाकैथल, गोहाना और यमुनानगर की मंडियों से भीगी हुई फसल को बाहर निकाला गया है, लेकिन उसे सूखने में समय लगेगा। प्रदेश में अब तक 16.44 लाख टन धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से 13.51 लाख टन की खरीद हो चुकी है।

झज्जर की अनाज मंडी में टिन शेड टूटने से कई क्विंटल बाजरा भीग गया, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। बारिश ने एक ओर जहां ठंड का आगाज किया है, वहीं किसानों के लिए फसल नुकसान की चिंता भी बढ़ा दी है।