हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिसकर्मियों को कठोर प्रशिक्षण से मिल सकती है राहत

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 39–45 वर्ष आयु के 36 हरियाणा पुलिसकर्मियों को अनिवार्य लोअर स्कूल कोर्स से छूट देने के अनुरोध पर राज्य सरकार को पूर्व फैसलों के आधार पर विचार करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,  पुलिसकर्मियों को कठोर प्रशिक्षण से मिल सकती है राहत

स्वास्थ्य कारणों से अनिवार्य लोअर स्कूल कोर्स से छूट पर विचार के निर्देश
पदोन्नति, वरिष्ठता और वित्तीय लाभ छोड़ने को तैयार पुलिसकर्मी
पूर्व न्यायिक फैसले के आधार पर राज्य सरकार को निर्णय लेने का आदेश



पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस के मध्यम आयु वर्ग के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 36 पुलिसकर्मियों को अनिवार्य लोअर स्कूल कोर्स (LSC) से छूट देने के उनके अनुरोध पर पूर्व न्यायिक निर्णयों के अनुरूप विचार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारी स्वयं पदोन्नति से जुड़े लाभों को छोड़ने के लिए तैयार हैं और कठोर प्रशिक्षण में भाग लेने की इच्छा नहीं रखते, तो उन्हें मजबूर करना तर्कसंगत नहीं माना जा सकता।

यह आदेश न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने “EHC अमित कुमार एवं अन्य” की याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता 39 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जिनमें कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल और सहायक उपनिरीक्षक शामिल हैं। ये पुलिसकर्मी करनाल, पानीपत, रोहतक, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सिरसा, झज्जर, फतेहाबाद, पलवल, भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी, हिसार, कुरुक्षेत्र और अंबाला जैसे विभिन्न जिलों में तैनात हैं।

अदालत को बताया गया कि इन सभी पुलिसकर्मियों को वर्ष 2022 के लिए 35 प्रतिशत आरक्षित कोटे के तहत सूची-बी1 लोअर स्कूल कोर्स के लिए चयनित किया गया था, जिसकी शुरुआत 2 फरवरी 2026 से हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन में होनी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब पदोन्नति सूची बनी थी, तब उनकी आयु 38 वर्ष से कम थी, लेकिन अब वे 40 से 45 वर्ष की आयु सीमा में पहुंच चुके हैं, जहां इस तरह का कठोर शारीरिक प्रशिक्षण उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि पारिवारिक और चिकित्सीय कारणों से इस प्रशिक्षण में भाग लेना उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। सभी 36 पुलिसकर्मियों ने विधिवत हलफनामे देकर यह स्पष्ट कर दिया कि वे प्रशिक्षण में भाग नहीं लेना चाहते और इसके बदले पदोन्नति, वरिष्ठता, एसीपी योजना के लाभ और अन्य वित्तीय उन्नयन से जुड़े सभी दावों को स्थायी रूप से छोड़ने के लिए सहमत हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में 4 सितंबर 2025 को दिए गए हाईकोर्ट के एक पूर्व निर्णय का हवाला दिया, जिसमें समान परिस्थितियों में कर्मचारियों को राहत दी गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी यह विवादित नहीं किया गया कि मौजूदा मामला उस पूर्व निर्णय से आच्छादित है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासनिक निर्णयों में व्यावहारिकता और मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना उतना ही जरूरी है, जितना कि सेवा नियमों का पालन। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की छूट संबंधी मांग पर पूर्व फैसले के अनुरूप विचार कर उचित निर्णय लिया जाए।