मानेसर जमीन घोटाले में पूर्व सीएम हुड्डा पर आरोप तय, 37 आरोपी कानून के दायरे, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला, 2 मार्च से सुनवाई
मानेसर जमीन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप तय हो गए हैं। पंचकूला की CBI अदालत ने 2 मार्च से नियमित ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है।
➤ मानेसर जमीन घोटाले में भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप तय
➤ सीबीआई कोर्ट ने 2 मार्च से ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया
➤ पूर्व आईएएस और बिल्डर लॉबी भी कानून के शिकंजे में
पंचकूला/चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें नए साल की शुरुआत में और बढ़ गई हैं। बहुचर्चित मानेसर जमीन घोटाले में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिए हैं। अदालत के इस फैसले के साथ ही अब इस मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप तय करते हुए कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस केस की नियमित सुनवाई 2 मार्च 2026 से शुरू की जाएगी।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से पेश वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका का हवाला देते हुए कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने साफ किया कि जिन आरोपियों के खिलाफ कोई स्पष्ट स्टे नहीं है, उनके मामले में ट्रायल आगे बढ़ाया जाएगा।
मानेसर जमीन घोटाला हरियाणा के सबसे बड़े भूमि विवादों में से एक माना जाता है। यह मामला 2004 से 2007 के बीच का है, जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य के मुख्यमंत्री थे। उस दौरान सरकार ने मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों की करीब 912 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए धारा-4 के तहत नोटिस जारी किए थे।
अधिग्रहण के डर से किसानों ने अपनी जमीनें निजी बिल्डरों को बेहद कम कीमत पर बेच दीं। आरोप है कि जमीन की खरीद के बाद सरकार ने अचानक अधिग्रहण की प्रक्रिया रद्द कर दी, जिससे बिल्डरों को भारी आर्थिक लाभ हुआ और किसानों को कथित तौर पर करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा।
साल 2015 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। लंबी जांच के बाद एजेंसी ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिस पर अब आरोप तय कर दिए गए हैं।
इस केस में केवल भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही नहीं, बल्कि कुल 37 आरोपी कानून के दायरे में हैं। इनमें तत्कालीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कई नामी रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े लोग शामिल हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी एम.एल. तायल, छत्तर सिंह और एस.एस. ढिल्लों के नाम भी आरोपियों की सूची में दर्ज हैं।
राजनीतिक दृष्टि से यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है। विपक्ष इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बता रहा है। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करार दिया है। दूसरी ओर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है और दावा कर रही है कि सच अंततः सामने आएगा।
Akhil Mahajan