सड़क हादसे में मौत पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने दोगुणा किया मुआवजा

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2016 सड़क हादसे में युवक की मौत पर MACT द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाकर 24.16 लाख रुपये किया। सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस के आधार पर आय और गणना में बदलाव किया गया।

सड़क हादसे में मौत पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने दोगुणा किया मुआवजा

➤ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मौत पर मुआवजा लगभग दोगुना किया
➤ MACT के 13.52 लाख के अवॉर्ड को बढ़ाकर 24.16 लाख रुपये किया
➤ सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के आधार पर बदली गई आय गणना



चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 के सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के माता-पिता को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि में 10.64 लाख रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। हाईकोर्ट ने हिसार मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा 2018 में दिए गए 13,52,022 रुपये के अवॉर्ड को बढ़ाकर 24,16,800 रुपये कर दिया।

यह मामला भूपेंद्र उर्फ विक्की की मौत से जुड़ा है, जिनकी 11 जून 2016 को एक सड़क दुर्घटना में जान चली गई थी। मृतक के माता-पिता ने MACT के फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि उनके बेटे की आय को बेहद कम आंका गया, जबकि वह आईटीआई हिसार से प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन था।

हाईकोर्ट के जस्टिस हरकेश मनुजा ने माना कि भले ही आय से जुड़ा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के आधार पर एक व्यावहारिक और यथार्थवादी आय तय की जा सकती है। अदालत ने कहा कि आईटीआई से प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन के पास स्थिर और सम्मानजनक आय का स्रोत होना सामान्य बात है।

अदालत ने मृतक की काल्पनिक मासिक आय 12,000 रुपये (400 रुपये प्रतिदिन) तय की। इसके साथ 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं जोड़ी गईं। व्यक्तिगत खर्चों के लिए सामान्य 50 प्रतिशत कटौती की बजाय, एक-तिहाई कटौती लागू की गई, क्योंकि मृतक अपने वृद्ध माता-पिता का एकमात्र सहारा था।

मृतक की आयु 30 वर्ष होने के कारण 17 का मल्टीप्लायर लगाया गया। इस आधार पर आश्रितों की क्षति (Loss of Dependency) के लिए 22,84,800 रुपये निर्धारित किए गए। इसके अतिरिक्त अंत्येष्टि खर्च 18,000 रुपये, एस्टेट लॉस 18,000 रुपये और फिलियल कंसोर्टियम 96,000 रुपये (48,000 रुपये प्रत्येक माता-पिता को) दिए गए।

इस तरह कुल मुआवजा राशि 24,16,800 रुपये तय की गई। अदालत ने पहले की तरह 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज बरकरार रखा और निर्देश दिया कि यदि बढ़ी हुई राशि तीन महीने में अदा नहीं की गई, तो उस पर 12 प्रतिशत ब्याज लगेगा।

बीमा कंपनी ने जिम्मेदारी और लापरवाही को चुनौती नहीं दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने माता-पिता की अपील को सही मानते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।