रेलूराम हत्या*कांड में दोषी बेटी और दामाद की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, समयपूर्व रिहाई पर हाईकोर्ट को दोबारा विचार करने के आदेश
रेलूराम हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी बेटी सोनिया और दामाद संजीव की रिहाई पर रोक लगा दी है और हाईकोर्ट को समयपूर्व रिहाई पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं।
➤ रेलूराम हत्याकांड में दोषी बेटी और दामाद की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
➤ समयपूर्व रिहाई पर हाईकोर्ट को दोबारा विचार करने के आदेश
➤ 9 फरवरी को दोबारा जेल भेजे जाने की संभावना
हरियाणा के चर्चित रेलूराम हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश ने एक बार फिर मामले को सुर्खियों में ला दिया है। पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के 8 सदस्यों की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए उनकी बेटी सोनिया और दामाद संजीव को मिली अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को समयपूर्व रिहाई के फैसले पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश उस याचिका पर आया है, जो रेलूराम पूनिया के भतीजों द्वारा दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर को उम्रकैद की सजा काट रहे सोनिया और संजीव को दो महीने की अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद दोनों की रिहाई पर फिलहाल पूरी तरह रोक लग गई है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे, ने साफ किया कि संबंधित प्राधिकरण द्वारा रिव्यू प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन उसका अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और न ही उसे फिलहाल लागू किया जाएगा। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोषियों की रिहाई को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
हिसार बार के वरिष्ठ अधिवक्ता और रेलूराम के भतीजे लाल बहादुर खोवाल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब जमानत पर कोई भी निर्णय प्रभावी नहीं रहेगा। ऐसे में सोनिया और संजीव को 9 फरवरी को दोबारा जेल जाना पड़ सकता है। वहीं, इस मामले में अगली सुनवाई 9 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया गया है।
यह मामला 23 अगस्त 2001 का है, जब हिसार के लितानी गांव स्थित फार्महाउस में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया समेत उनके परिवार के 8 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि संपत्ति विवाद के चलते यह वारदात की गई थी। यह मामला हरियाणा के सबसे सनसनीखेज हत्याकांडों में गिना जाता है।
निचली अदालत ने वर्ष 2004 में सोनिया और संजीव को मृत्युदंड सुनाया था, जिसे बाद में उच्च अदालतों में चुनौती दी गई। कई कानूनी प्रक्रियाओं और दया याचिकाओं के बाद वर्ष 2014 में उनकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था। हालिया जमानत और अब उस पर लगी रोक ने एक बार फिर पीड़ित परिवार और समाज में बहस छेड़ दी है।
Akhil Mahajan