सोनीपत कोर्ट ने 9 साल पुराने दूधिया हत्याकांड में पांच को उम्रकैद सुनाई
सोनीपत कोर्ट ने 9 साल पुराने विकास उर्फ दूधिया हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पांच दोषियों को उम्रकैद और प्रत्येक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह हत्या 2016 में कोर्ट परिसर में हुई थी, जबकि एक आरोपी इंस्पेक्टर कंवल सिंह का ट्रायल अभी जारी है।
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सोनीपत कोर्ट ने 9 साल पुराने विकास उर्फ दूधिया हत्याकांड में सुनाया फैसला
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पांच दोषियों को उम्रकैद और प्रत्येक पर एक लाख रुपए जुर्माना
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कोर्ट ने कहा—अदालत परिसर में हत्या कानून-व्यवस्था पर सीधी चोट
सोनीपत से बड़ी खबर। नौ साल पुराने विकास उर्फ दूधिया हत्याकांड में शुक्रवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। एडिशनल सेशन जज सुभाष सिरोही की अदालत ने इस चर्चित हत्या मामले में पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने कहा कि यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला साल 2016 में सोनीपत कोर्ट परिसर में हुई दिनदहाड़े हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे हरियाणा में सनसनी फैला दी थी। मार्च 2016 में पेशी के दौरान कुख्यात विकास उर्फ दूधिया को कोर्ट परिसर में गोलियों से भून दिया गया था। बताया गया कि यह हत्या विकास गैंग और संदीप बड़वासनी गैंग की पुरानी रंजिश का नतीजा थी। हमलावरों ने विकास पर तीन गोलियां दागीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
पुलिस ने वारदात के तुरंत बाद बरोणा निवासी रूपेंद्र उर्फ नन्हा और दिल्ली के मुंगेशपुर निवासी गौरव उर्फ मीता को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पुलिस ने रवि घेवरा, अजय बरोणा, यशवीर दिल्ली, सुमित और राहुल जाजी को भी आरोपी बनाया। बाद में इस मामले में गार्द इंचार्ज इंस्पेक्टर कंवल सिंह पर भी हमलावरों की मदद के आरोप लगे।
एडवोकेट कमल हुड्डा ने बताया कि वेदपाल की शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई थी। गवाहियों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने अंततः पांच आरोपियों — रूपेंद्र उर्फ नन्हा, गौरव उर्फ मीता, सुमित उर्फ भोलू, अजय उर्फ बिट्टू और यशवीर (दिल्ली) — को हत्या का दोषी ठहराया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध न केवल एक व्यक्ति के खिलाफ हिंसा थी, बल्कि समाज में कानून और न्याय प्रणाली के प्रति भय और अविश्वास पैदा करने वाला कृत्य भी था। कोर्ट परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर हत्या करना कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती है, इसलिए यह गंभीरतम अपराध की श्रेणी में आता है।
वहीं, आरोपी इंस्पेक्टर कंवल सिंह के खिलाफ ट्रायल अभी जारी है। वह इस समय सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर हैं। अदालत में उनके खिलाफ सुनवाई की अगली तारीख जल्द तय की जाएगी।
इस फैसले से पीड़ित पक्ष ने राहत की सांस ली है। वहीं, कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े हुई यह हत्या एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर गई है।
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