कौन हैं SP नरेंद्र बिजारणिया जिनपर गिरी पूरन कुमार केस में गाज, कभी सरकार से मिली थी शाबाशी, इस कुख्यात गैंगस्टर के खात्मे में था हाथ
पूरन कुमार सुसाइड केस में हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया को हटा दिया। 11 माह 7 दिन तक रोहतक की कमान संभालने वाले बिजारणिया नूंह हिंसा में अपने सख्त एक्शन के लिए मशहूर थे।
➤ पूरन कुमार केस में गिरी गाज SP नरेंद्र बिजारणिया पर
➤ 11 माह 7 दिन रोहतक की कमान संभाली
➤ कभी नूंह हिंसा रोककर ली थी सरकार से शाबाशी
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद उठे विवाद ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। सरकार ने शनिवार को रोहतक के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया को उनके पद से हटा दिया। सरकार के गृह मंत्रालय से जारी आदेश में कहा गया है कि बिजारणिया की जगह अब आईपीएस सुरेंद्र सिंह भौरिया को रोहतक का नया एसपी नियुक्त किया गया है। फिलहाल बिजारणिया को कहीं और पोस्टिंग नहीं दी गई है।
पूरन कुमार की आईएएस पत्नी अमनीत पी. कुमार ने हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और एसपी नरेंद्र बिजारणिया पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि उनके पति को दोनों अफसरों ने करप्शन केस में झूठा फंसाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
यही कारण था कि सरकार पर कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ता गया और अंततः बिजारणिया को उनके पद से हटाना पड़ा।
पूरन कुमार के सुसाइड केस में 15 अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इनमें डीजीपी और बिजारणिया दोनों के नाम शामिल हैं। आईजी पुष्पेंद्र कुमार की अगुवाई में 6 सदस्यीय एसआईटी जांच कर रही है। आईपीएस नरेंद्र बिजारणिया ने रोहतक जिले की कमान 11 माह 7 दिन तक संभाली। 2015 बैच के यह आईपीएस अधिकारी राजस्थान के सीकर जिले के रहने वाले हैं। आईपीएस बनने से पहले वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम विभाग में अधिकारी रहे हैं।
यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद उन्हें हरियाणा कैडर मिला।
रोहतक में उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बड़े अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाए। सीआईए टीमों को लगातार सक्रिय रखा और सात से आठ एनकाउंटर कराए, जिनमें कई कुख्यात अपराधी पकड़े गए या मारे गए। उनकी पहचान एक एक्शन-ओरिएंटेड अफसर के रूप में रही।
जुलाई 2023 में जब नूंह में हिंसा भड़की थी, तो सरकार ने हालात संभालने के लिए बिजारणिया को भिवानी से ट्रांसफर कर नूंह का एसपी बनाया था। उन्होंने वहां कमान संभालते ही भीड़ को कंट्रोल किया और हालात पर काबू पाया। सरकार ने उनके काम की खुले तौर पर सराहना की थी और उस समय उन्हें “कठिन हालात में मजबूत अफसर” कहा गया था।ट्रेनिंग के दौरान बिजारणिया राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर से जुड़े अभियान का हिस्सा बने थे। उन्होंने सिरसा से उस गैंग की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी। इस जानकारी के आधार पर राजस्थान पुलिस ने आनंदपाल के भाई विक्की और देवेंद्र को पकड़ा, और बाद में मालासर एनकाउंटर में आनंदपाल मारा गया। यह ऑपरेशन उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ था, जिसने उन्हें ‘फील्ड अफसर’ की पहचान दी।
अब विवादों में फंसे अफसर
पूरन कुमार सुसाइड केस के बाद नरेंद्र बिजारणिया का नाम जब चंडीगढ़ पुलिस की एफआईआर में आया तो पूरे पुलिस विभाग में हलचल मच गई। पूरन कुमार की पत्नी अमनीत का आरोप है कि “एसपी बिजारणिया ने जानबूझकर मेरे पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।” उन्होंने मांग की थी कि डीजीपी कपूर और एसपी बिजारणिया को तुरंत हटाकर गिरफ्तार किया जाए। इसी दबाव में शनिवार को सरकार ने बिजारणिया को हटा दिया। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, अभी डीजीपी शत्रुजीत कपूर पर भी कार्रवाई को लेकर विचार चल रहा है। संभावना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद बड़ा फैसला हो सकता है।
एसआईटी जांच से तय होगा अगला कदम
पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद सरकार ने आईजी पुष्पेंद्र कुमार के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित की है। यह टीम डीजीपी, एसपी और अन्य अफसरों के खिलाफ दर्ज केस की जांच कर रही है। फिलहाल पूरन कुमार की डेडबॉडी चंडीगढ़ पीजीआई में पोस्टमॉर्टम के लिए रखी गई है, जहां परिवार और प्रशासन के बीच सहमति बनने की खबरें हैं। पूरन कुमार की मौत ने हरियाणा के पुलिस सिस्टम को झकझोर दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या सरकार डीजीपी तक कार्रवाई की आंच पहुंचाएगी या नहीं।
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