सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश, CJI बोले – मैं परेशान नहीं हूं

सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। आरोपी वकील राकेश किशोर भगवान विष्णु मूर्ति टिप्पणी से नाराज था। सुरक्षा ने तुरंत वकील को पकड़ लिया। CJI बोले – मुझे फर्क नहीं पड़ता।

सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश, CJI बोले – मैं परेशान नहीं हूं
  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक वकील ने सीजेआई बीआर गवई पर हमला करने की कोशिश की

  • सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत वकील को पकड़ा, सीजेआई बोले – "मैं परेशान नहीं हूं"

  • आरोपी वकील राकेश किशोर, विष्णु मूर्ति बहाली मामले की टिप्पणी से थे नाराज


सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक चौंकाने वाली घटना हुई। सुनवाई के दौरान एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। यह घटना उस समय हुई जब सीजेआई की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, कोर्ट रूम में मौजूद वकीलों ने बताया कि आरोपी वकील ने अचानक सीजेआई की ओर जूता फेंका, लेकिन वह बेंच तक नहीं पहुंच सका। सुरक्षाकर्मियों ने फौरन उसे पकड़ लिया। बाहर ले जाए जाने के दौरान उसने नारा लगाया – “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”

घटना के बाद सीजेआई गवई ने अदालत में मौजूद वकीलों से शांति बनाए रखने और अपनी दलीलें जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा – “इस सबसे परेशान न हों। मैं भी परेशान नहीं हूं, इन चीजों से मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी वकील का नाम राकेश किशोर कुमार है। उनका सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल रजिस्ट्रेशन 2011 का है। शुरुआती जांच में पता चला है कि वे CJI गवई की उस टिप्पणी से नाराज थे, जो उन्होंने भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान दी थी।

16 सितंबर को सुनवाई के दौरान CJI गवई ने याचिकाकर्ता से कहा था – “जाओ और भगवान से खुद करने को कहो। अगर तुम भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो, तो उनसे प्रार्थना करो।” इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर विरोध बढ़ा था, जिसे लेकर कई संगठनों ने नाराजगी जताई थी।


क्या है भगवान विष्णु की मूर्ति वाला मामला?

मध्य प्रदेश के खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची खंडित मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति कथित तौर पर मुगल काल में टूट गई थी। भक्तों की ओर से याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि मूर्ति की पुनर्स्थापना कराई जाए और मंदिर में पूजा की अनुमति दी जाए।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका 16 सितंबर को खारिज कर दी, कहते हुए कि “प्रतिमा जिस स्थिति में है, उसी में रहेगी।” अदालत ने यह भी कहा कि अगर श्रद्धालु पूजा करना चाहते हैं तो वे किसी अन्य मंदिर जा सकते हैं।


CJI की सफाई और विवाद पर प्रतिक्रिया

टिप्पणी पर विवाद बढ़ने के बाद 18 सितंबर को CJI बीआर गवई ने स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा कि मेरी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया है। “मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं,” उन्होंने कहा।

बेंच में शामिल जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने भी कहा कि सोशल मीडिया अब “एंटी-सोशल मीडिया” बन चुका है, जहां बातें तोड़-मरोड़कर दिखाई जाती हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि “मैं CJI को 10 साल से जानता हूं, वे सभी धर्मों और पूजा स्थलों का सम्मान करते हैं। आजकल सोशल मीडिया पर बातें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती हैं।”

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने भी सहमति जताई कि सोशल मीडिया के कारण अब वकीलों और न्यायपालिका को रोजाना गलतफहमियों का सामना करना पड़ता है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा –
“न्यायालय न्याय का मंदिर है। भारतीय समाज की न्यायालयों पर श्रद्धा और विश्वास है। हम सबका कर्तव्य है कि यह विश्वास बना रहे और मजबूत हो। साथ ही, वाणी में संयम रखना सभी का दायित्व है — चाहे वह वकील हो या न्यायाधीश।”


खजुराहो के जावरी मंदिर की खासियत

  • जावरी मंदिर खजुराहो का ऐसा मंदिर है जिसे साइड व्यू से पूरा देखा जा सकता है

  • इसकी वास्तुकला यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है।

  • यहां भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति के कारण नियमित पूजा नहीं होती।

  • मंदिर में भगवान विष्णु के सभी अवतारों को चित्रित किया गया है।