उचाना सीट पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 32 वोटों से जीत का मामला

उचाना सीट पर भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री और बृजेंद्र सिंह के बीच 32 वोटों से हुए चुनावी मुकाबले पर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कैंसिल वोटों की दोबारा जांच न होने पर विवाद गहराया।

उचाना सीट पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 32 वोटों से जीत का मामला
  • उचाना सीट पर 32 वोटों से जीत का मामला
  • हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा
  • कैंसिल वोटों की दोबारा जांच न होने पर उठी कानूनी चुनौती

हरियाणा की राजनीति में चर्चित उचाना विधानसभा सीट का चुनावी विवाद अब अदालत के पन्नों पर पहुँच चुका है। भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई। इस याचिका में अत्री ने पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह द्वारा दाखिल की गई पुनः याचिका को खारिज करने की मांग की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अगली सुनवाई में इस पर निर्णायक आदेश आएगा।

गौरतलब है कि उचाना सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव में बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री ने मात्र 32 वोटों से बृजेंद्र सिंह को मात दी थी। यह नतीजा प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। हार के बाद बृजेंद्र सिंह ने मार्च माह में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

बृजेंद्र सिंह की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि चुनाव में जिन वोटों को कैंसिल या रिजेक्ट किया गया, उनकी संख्या हार-जीत के अंतर से कहीं अधिक थी। ऐसे में चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार रिटर्निंग अधिकारी को गिनती पूरी होने के बाद उन सभी कैंसिल वोटों की मौके पर पुनः जांच करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। याचिका में इसी प्रक्रिया की खामी को आधार बनाते हुए चुनाव परिणाम को चुनौती दी गई।

वहीं, देवेंद्र अत्री ने अपने पक्ष में दलील दी कि मतगणना पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के तहत हुई। रिजेक्ट वोटों की पुनः जांच की कोई आवश्यकता नहीं थी और अब विरोधी पक्ष केवल हार को चुनौती देने के लिए कानूनी दांव चला रहा है।

अब पूरा मामला अदालत के पाले में है। हाईकोर्ट का आने वाला फैसला न केवल इस सीट बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर पर असर डाल सकता है। खासकर तब, जब अंतर सिर्फ 32 वोट का रहा और रिजेक्ट वोटों की संख्या उससे अधिक पाई गई। यदि अदालत पुनः जांच का आदेश देती है तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।