जम्मू-कश्मीर हादसे में हरियाणा का एक और लाल शहीद , देश ने गंवाएं जाबांज
जम्मू-कश्मीर के डोडा में सेना की गाड़ी खाई में गिरने से 10 जवान शहीद हो गए। हादसे में यमुनानगर के शेरपुर गांव के जवान सुधीर नरवाल ने भी देश के लिए बलिदान दिया।
जम्मू-कश्मीर के डोडा में सेना की गाड़ी खाई में गिरने से 10 जवान शहीद
यमुनानगर के शेरपुर गांव का जवान सुधीर नरवाल शहीद
बर्फ जमी सड़क पर वाहन फिसलने से हुआ दर्दनाक हादसा
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में भारतीय सेना के 10 जवान शहीद हो गए। यह हादसा उस समय हुआ, जब सेना की एक गाड़ी भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास करीब 400 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 11 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें एयरलिफ्ट कर उधमपुर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस हादसे में हरियाणा के यमुनानगर जिले के छछरौली ब्लॉक के गांव शेरपुर निवासी 32 वर्षीय आर्मी जवान सुधीर नरवाल भी शहीद हो गए। शहीद होने की सूचना गुरुवार देर शाम परिजनों को दी गई, जिसके बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम है और लोग शहीद के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
शहीद सुधीर नरवाल अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता हरपाल सिंह का वर्ष 2017 में निधन हो चुका था। पिता के जाने के बाद सुधीर ही पूरे परिवार का सहारा थे। सुधीर दो बहनों के इकलौते भाई थे और परिवार की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रहे थे।
परिजनों ने बताया कि सुधीर वर्ष 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। करीब दो साल पहले ही उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई थी। परिवार में अब उनकी मां उर्मिला देवी, पत्नी रूबी और सात साल का बेटा अयांश रह गया है। शहीद की शहादत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिजनों के अनुसार सुधीर आखिरी बार दिवाली पर छुट्टी लेकर घर आए थे। इसके बाद 20 नवंबर को वह ड्यूटी पर लौट गए थे। परिवार में 20 फरवरी को एक शादी समारोह था, जिसमें शामिल होने का उन्होंने पूरा भरोसा दिया था। बुधवार को ही उन्होंने मां, पत्नी और बेटे से फोन पर बात की थी और जल्द घर आने की बात कही थी।
गुरुवार शाम को शहादत की सूचना मिलते ही पत्नी रूबी बेसुध हो गईं। सेना के अधिकारी ने परिवार से संपर्क कर पार्थिव शरीर लाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। खराब मौसम के चलते पार्थिव शरीर के अंबाला पहुंचने में देरी हो रही है। मौसम साफ होते ही पार्थिव शरीर गांव शेरपुर लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
हादसे को लेकर प्रशासन ने बताया कि सड़क पर जमी बर्फ के कारण वाहन चालक का संतुलन बिगड़ गया, जिससे गाड़ी खाई में जा गिरी। खन्नी टॉप इलाका समुद्र तल से करीब 9 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां मौसम तेजी से बदलता है और बर्फबारी के बाद सड़क बेहद खतरनाक हो जाती है।
सीएम नायब सैनी ने जताया दुख
वहीं हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने झज्जर के माहित चौहान और यमुनानगर के सुधीर नरवाल की शहादत पर शोक व्यक्त किया है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सीएम नायब सिंह सैनी ने लिखा कि, दुख की इस घड़ी में झज्जर के वीर सपूत श्री मोहित चौहान और यमुनानगर के वीर सपूत श्री सुधीर नरवाल जी के परिजनों के प्रति मैं संवेदना व्यक्त करता हूं। भारत माता के चरणों में प्राण अर्पित करने वाले वीर सपूतों की आत्मा की शांति और शोकाकुल आत्मीयजनों को इस इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। ऊँ शांति।

शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
शहीद सुधीर के चचेरे भाई सुशील ने बताया कि सुधीर का की पार्थिव देह हवाई जहाज से अंबाला कैंट एयरफोर्स स्टेशन पर आएगी। जिसके बाद सड़क मार्ग से उसे यमुनानगर लाया जाएगा। आज दोपहर 2 बजे तक शव अंबाला पहुंचने की संभावना थी, लेकिन मौसम खराब होने के चलते देरी हो रही है। उनकी आर्मी ऑफिसर से बात हुई है। मौसम के साफ होते ही बॉडी को लाया जाएगा। अंदेशा है कि आज शाम तक सुधीर का शव गांव में जाए। उसका अंतिम संस्कार कल शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

पिता का साया पहले ही उठ चुका था
शहीद सुधीर नरवाल के परिवार पर यह दुख पहाड़ टूटने जैसा है। सुधीर दो बहनों का इकलौता भाई था। उनके पिता हरपाल सिंह का पहले ही वर्ष 2017 में निधन हो चुका था। पिता के जाने के बाद घर का सहारा बने सुधीर की शहादत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में हर आंख नम है और लोग शहीद के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
सुधीर के चचेरे भाई सुशील कुमार ने बताया कि सुधीर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता हरपाल सिंह किसान थे, जिनका सपना था कि बेटा सुरक्षित जीवन जिए। वे अक्सर सुधीर से कहते थे कि वह आर्मी में न जाकर कोई सिविल नौकरी कर ले, क्योंकि वह घर का इकलौता चिराग है।

परिवार में अब मां, पत्नी व बेटा ही बचा
सुधीर के दिल में देश सेवा का जज्बा था। उन्होंने दिन-रात मेहनत की और आखिरकार 2015 में भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने सपने को साकार किया। करीब दो साल पहले ही उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई थी।
परिवार में अब मां उर्मिला देवी, पत्नी रूबी और सात साल का मासूम बेटा अयांश ही रह गए हैं। मां का सहारा, पत्नी का जीवनसाथी और बेटे का पिता देश के लिए बलिदान हो गया। यह सोचकर हर किसी का कलेजा कांप उठता है।

आखिरी बार पत्नी से कहा- जल्द आ रहा हूं
सुशील कुमार ने बताया कि सुधीर आखिरी बार दिवाली पर छुट्टी लेकर घर आए थे। इसके बाद 20 नवंबर को वह वापस ड्यूटी पर लौट गए थे। परिवार में 20 फरवरी को सुधीर की बुआ की पोती की शादी थी, जिसमें आने की उन्होंने पूरी प्लानिंग कर रखी थी। सुधीर ने परिवार से कहा था कि वह 26 जनवरी के बाद घर जरूर आएंगे और शादी की तैयारियां शुरू रखने को कहा था।
बुधवार को ही सुधीर ने अपनी मां उर्मिला देवी, पत्नी रूबी और बेटे अयांश से फोन पर बात की थी। फोन पर उन्होंने कहा था कि वह जल्द घर आने वाले हैं और काफी खुश भी लग रहे थे। किसी को अंदेशा तक नहीं था कि यह बातचीत आखिरी होगी।

शहीद की सूचना मिलते ही बेसुध हुई पत्नी
गुरुवार शाम को जब सुधीर की पत्नी रूबी अपनी जेठानी के साथ खेतों की ओर टहलने गई हुई थीं, तभी एक आर्मी ऑफिसर का फोन आया। फोन पर सुधीर के शहीद होने की सूचना मिलते ही रूबी बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं। आसपास के लोगों ने उन्हें संभाला और तुरंत घर लेकर आए। आर्मी ऑफिसर ने फोन पर यह भी पूछा कि परिवार के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कौन सा पड़ेगा।
मौसम खराब होने के चलते नहीं पहुंचा पार्थिव शरीर
परिजनों को बताया गया था कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे शहीद सुधीर नरवाल का पार्थिव शरीर अंबाला एयरपोर्ट पर पहुंच जाएगा, लेकिन खराब मौसम के चलते इसमें देरी हो रही है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि मौसम साफ होते ही शाम तक पार्थिव शरीर गांव शेरपुर पहुंच जाएगा, जहां पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

Akhil Mahajan