हरियाणा ADA भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा झटका, पूरी प्रक्रिया रद्द
हरियाणा में ADA के 255 पदों की भर्ती पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने जनरल नॉलेज आधारित स्क्रीनिंग टेस्ट को अवैध बताया और पूरी प्रक्रिया रद्द की।
➤ ADA भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 255 पदों की पूरी प्रक्रिया रद्द
➤ कोर्ट बोला — जनरल नॉलेज टेस्ट से कानूनी योग्यता का आकलन नहीं हो सकता
➤ भर्ती प्रक्रिया को “मनमानी” और “संवैधानिक रूप से अस्थिर” बताया गया
हरियाणा सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के अभियोजन विभाग में सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) के 255 पदों के लिए चलाई जा रही पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने अपने 36 पेज के विस्तृत आदेश में कहा कि एग्जाम का सिलेबस और स्क्रीनिंग टेस्ट “भर्ती के उद्देश्य से तार्किक रूप से असंबंधित” है। उन्होंने कहा, “जनरल नॉलेज पर आधारित परीक्षा से उम्मीदवार के कानूनी कौशल का आकलन नहीं किया जा सकता। यह योग्य अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से बाहर करने वाली प्रक्रिया है।”
जस्टिस मौदगिल ने आगे लिखा — “कानूनी ज्ञान से रहित छलनी से महत्वाकांक्षी कानूनी विशेषज्ञों को छांटना भर्ती के मूल उद्देश्य के साथ विश्वासघात है।” अदालत ने कहा कि ऐसा सिलेबस, जिसमें कानून के विषयों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया और केवल सामान्य विज्ञान, इतिहास, भूगोल, समसामयिक घटनाएं व गणित रखी गईं, मनमाने ढंग से तैयार किया गया है।
8 अगस्त को हुआ था एग्जाम
यह परीक्षा 8 अगस्त 2025 को आयोजित की गई थी। याचिकाकर्ता लखन सिंह, नवेंद्र और अमन दलाल सहित अन्य वकीलों ने HPSC के विज्ञापन और एग्जाम पैटर्न को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि पिछली भर्तियों में स्क्रीनिंग टेस्ट में कानून से संबंधित प्रश्न शामिल रहते थे, लेकिन इस बार जनरल सब्जेक्ट्स रखे गए, जो इस पद की प्रकृति से असंबंधित हैं।
कोर्ट ने कहा — यह “बहिष्कारक प्रथा” है
जस्टिस मौदगिल ने माना कि ADA की भूमिका के लिए आपराधिक कानून, साक्ष्य और प्रक्रिया में विशेषज्ञता आवश्यक है। उन्होंने कहा, “स्क्रीनिंग परीक्षा से कानून को पूरी तरह बाहर रखकर, आयोग ने चयन के तरीके और उद्देश्य के बीच के तर्कसंगत संबंध को नष्ट कर दिया।”
कोर्ट ने आगे कहा कि यह परीक्षा बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को उनके कानूनी ज्ञान का आकलन किए बिना ही बाहर कर देती है। अदालत ने इसे “बहिष्कारक प्रथा” बताया जो संवैधानिक समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन करती है।
ऐसे भरे जाने थे ये पद
भर्ती में कुल 255 पद शामिल थे — 134 जनरल, 26 अनुसूचित जाति, और 54 पिछड़ा वर्ग (BCA व BCB)। उम्मीदवारों के पास कानून की डिग्री, 10वीं तक हिंदी या संस्कृत और अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण आवश्यक था।
प्रक्रिया में तीन चरण रखे गए थे —
1️⃣ 100 प्रश्नों की स्क्रीनिंग परीक्षा (25% अंक आवश्यक),
2️⃣ विषय ज्ञान परीक्षा (87.5% अंक, सिविल व क्रिमिनल लॉ पर केंद्रित),
3️⃣ साक्षात्कार (12.5% अंक)।
सिर्फ पहले चरण में सफल अभ्यर्थी ही अगले दौर में जा सकते थे।
HPSC ने दिया था यह बचाव
हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने तर्क दिया कि उसे शॉर्टलिस्टिंग तय करने का विवेकाधिकार है और कानूनी ज्ञान की जांच बाद में की जानी थी। आयोग ने कहा कि ADA अधिकारियों को विस्तृत जागरूकता की जरूरत होती है, क्योंकि वे विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्त होते हैं।
लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि “प्रशासनिक सुविधा के लिए उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। उत्तर पुस्तिकाओं का बोझ कम करने के लिए सार्वजनिक रोजगार में निष्पक्ष अवसर खत्म नहीं किया जा सकता।”
Author1