फर्जी MBA डिग्री से 4 साल से सरकारी नौकरी, मोनाड यूनिवर्सिटी का खुला खेल, चेयरमैन-वीसी तक सलाखों के पीछे
पलवल जिला परिषद असिस्टेंट CEO की MBA डिग्री पर सवाल खड़े। मोनाड यूनिवर्सिटी ने कहा यहां पढ़ाई ही नहीं हुई। चेयरपर्सन ने फर्जी डिग्री से नौकरी और रिश्तेदारों को नौकरी दिलवाने के लगाए आरोप। मामला जांच में।
➤ पलवल जिला परिषद असिस्टेंट CEO की MBA डिग्री पर सवाल, चेयरपर्सन ने CM और प्रशासन को दी शिकायत
➤ मोनाड यूनिवर्सिटी से जारी डिग्री फर्जी बताई गई, यूनिवर्सिटी ने पत्र में कहा यहां पढ़ाई ही नहीं की
➤ 18 रिश्तेदारों को भी फर्जी डिग्रियों से नौकरी दिलवाने का आरोप, DC बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
हरियाणा के पलवल जिले में जिला परिषद के असिस्टेंट CEO युधिष्ठिर की MBA डिग्री विवादों के घेरे में आ गई है। जिला परिषद की चेयरपर्सन रेखा ने इस मामले में उच्च अधिकारियों और प्रशासन से शिकायत करते हुए सवाल उठाया है कि युधिष्ठिर ने जिस डिग्री का इस्तेमाल कर साल 2021 से पंचायत विभाग में नौकरी हासिल की है, वह वैध है या नहीं।
सवाल उठाई गई डिग्री उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी से जारी हुई है। यह वही यूनिवर्सिटी है, जिसमें यूपी स्पेशल टास्क फोर्स ने हाल ही में फर्जी मार्कशीट और डिग्री के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन और कर्मचारी मिलकर नकली मार्कशीट, डिग्रियां, प्रोविजनल और माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी करते थे। इस मामले में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा, प्रो-वाइस चांसलर नितिन कुमार सिंह समेत 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
चेयरपर्सन रेखा का आरोप है कि युधिष्ठिर ने रूरल डवलपमेंट में MBA की डिग्री का इस्तेमाल कर साल 2021 में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर नौकरी हासिल की। इस डिग्री के आधार पर युधिष्ठिर चार साल से सरकार से वेतन ले रहे हैं। रेखा ने यह भी दावा किया कि युधिष्ठिर ने अपने करीब 18 रिश्तेदारों को इसी यूनिवर्सिटी से डिग्रियां दिलवाईं, जिनके आधार पर उन्हें भी पंचायत विभाग में नौकरियां मिलीं।
मामला पहली बार मार्च 2023 में सामने आया था, जब ग्रामीण राजकुमार ने युधिष्ठिर पर फर्जी डिग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उस समय की जांच में यूनिवर्सिटी के अंदर काम करने वाले गिरोह की मदद से डिग्री को वैध दिखा दिया गया, जिससे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
लेकिन 13 सितंबर 2025 को चेयरपर्सन रेखा ने फिर से जांच की मांग की। इसके बाद मोनाड यूनिवर्सिटी से प्राप्त रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि एनरोलमेंट नंबर MU1719MBA50942 वाले छात्र युधिष्ठिर ने कभी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई नहीं की। चेयरपर्सन ने आरोप लगाया कि युधिष्ठिर ने पैसे देकर फर्जी डिग्री बनवाई।
युधिष्ठिर ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि उनकी डिग्री की पहले वेरिफिकेशन की जा चुकी है और यह सही पाई गई थी। उन्होंने चेयरपर्सन द्वारा दिखाए गए वेरिफिकेशन लेटर को नकली बताया और प्रशासन की जांच पर भरोसा जताया। युधिष्ठिर ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद वे उन लोगों के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे।
डीसी हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि जिला परिषद चेयरपर्सन से शिकायत मिली है और मामले की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
मोनाड यूनिवर्सिटी में चल रहे रैकेट का खुलासा मई 2025 में हुआ, जिसमें 1,372 नकली डिग्रियां और मार्कशीट्स, 262 नकली प्रोविजनल व माइग्रेशन सर्टिफिकेट्स बरामद किए गए। रैकेट में शामिल लोगों ने छात्रों से ₹50,000 से ₹4,00,000 तक की राशि वसूली। इस मामले में FIR दर्ज की गई है और जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की है।
यह मामला पलवल जिला परिषद में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी पाने और प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया को लेकर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।