पाइट संस्कृति स्कूल पिटाई कांड: आयोग के दबाव आखिरकार बच्चों का मेडिकल, सहमे दिखे,अभिभावकों प्रबंधन की बैठक रद्द, विधायक ने एसपी से मांगी रिपोर्ट
पानीपत के पाइट संस्कृति स्कूल पिटाई मामले में आयोग के हस्तक्षेप से मेडिकल हुआ, बैठक रद्द हुई और अभिभावकों का गुस्सा बढ़ा। विधायक विज ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की बात कही।
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बाल संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप पर बच्चों का मेडिकल हुआ, बच्चे सहमे हुए मिले
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स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की बैठक रद्द, टकराव और बढ़ा
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विधायक प्रमोद विज बोले—दुर्व्यवहार हुआ तो सजा तय, लेकिन निष्पक्ष जांच भी जरूरी
पानीपत के पाइट संस्कृति स्कूल में बच्चों की बेरहमी से पिटाई मामले ने एक बार फिर उबाल पकड़ लिया है। बच्चे घटना के सदमे से उबर नहीं पाए हैं। बाल संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप के बाद बच्चों का मेडिकल करवाया गया, जिसमे बच्चे सहमे और डरे हुए दिखाई दिए। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से लगातार लापरवाही बरती जा रही है। उधर मामले में पानीपत शहरी विधायक प्रमोद विज ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है। एसपी से पूरी रिपोर्ट ली जाएगी।
वहीं अभिभावकों और प्रबंधन के बीच आज होने वाली अहम बैठक अचानक रद्द हो गई। इस बैठक में आगे की रणनीति तय होनी थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच खींचतान बढ़ने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन शुरुआत से ही सहयोग नहीं कर रहा और दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है।
घटना के बाद टीचर की ओर से दर्ज कराई गई क्रॉस FIR ने अभिभावकों का आक्रोश और भड़का दिया है। अभिभावकों का कहना है कि उल्टा बच्चों पर अपराध साबित करने की कोशिश हो रही है, जबकि वीडियो और शिकायतें साफ दर्शाती हैं कि बच्चों की बुरी तरह पिटाई की गई।
मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। पानीपत शहरी विधायक प्रमोद विज ने कहा कि अगर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार हुआ है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। विज ने बताया कि वह मामले की पूरी जानकारी एसपी से लेंगे। उन्होंने माना कि बच्चे मेडिकल के दौरान डरे हुए थे और यह चिंता का विषय है। विज ने कहा कि मेडिकल में देरी नहीं होनी चाहिए थी और किसी भी नागरिक का यह अधिकार है कि वह बिना किसी मदद के मेडिकल करवा सके।
विज ने यह भी कहा कि स्कूल बड़ा और प्रतिष्ठित है, लेकिन यदि किसी टीचर ने गलती की है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने साफ किया कि बिना जांच पूरी हुए किसी को दोषी या निर्दोष नहीं कहा जा सकता। मामला अब जांच के दायरे में है और अभिभावक आगामी कदम तय करने के लिए अलग से बैठक कर रहे हैं।
अभिभावकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रबंधन पारदर्शी जांच नहीं करवाता और दोषियों पर कड़ा एक्शन नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस पूरे प्रकरण ने स्कूल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।
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