पानीपत शुगर मिल में ₹5.19 करोड़ का घोटाला, ACB ने दर्ज किया केस,11 अफसरों पर आरोप, 6 सस्‍पेंड

पानीपत शुगर मिल के डिस्टलरी विभाग में 85,630 क्विंटल शीरा चोरी कर ₹5.19 करोड़ का घोटाला हुआ, करनाल ACB ने 11 कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर 6 को निलंबित किया, जांच जारी है और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है

पानीपत शुगर मिल में  ₹5.19 करोड़ का घोटाला, ACB ने दर्ज किया केस,11 अफसरों पर आरोप, 6 सस्‍पेंड

85,630 क्विंटल शीरा चोरी
₹5.19 करोड़ का नुकसान
11 अफसरों पर ACB में केस, 6 सस्पेंड



पानीपत। हरियाणा की पानीपत शुगर मिल में सामने आए बड़े घोटाले ने कृषि व प्रशासनिक दायरों में सनसनी फैला दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि मिल के डिस्टलरी विभाग के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर 85,630 क्विंटल शीरा (molasses) की चोरी कर राज्य को लगभग ₹5.19 करोड़ का सीधा आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। यह वही शीरा था जो शराब बनाने के लिए रिजर्व रखा जाता है और जिसका निर्धारित उपयोग व रिकार्डिंग सख्ती से की जानी चाहिए थी। इस गड़बड़ी की जानकारी मिलने पर मुख्यालय के आदेश पर 27 अक्टूबर को करनाल की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामला दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, कारस्तानी ऐसी थी कि उत्पादन व तौल के रजिस्टरों में हेराफेरी कर अतिरिक्त शीरा रिकॉर्ड से हटाकर बाहरी डीलर एजेंसियों को बेचा गया, जबकि बिलिंग और स्टॉक रिपोर्ट में जानबूझकर अंतर दिखाया गया था। मिल के सुक्रमपाल (पूर्व चीफ केमिस्ट), मदनलाल (लैब इंचार्ज), लेखाकार दीपक मित्तल व यशपाल, पूर्व डिस्टलरी मैनेजर रमेश सरोहा व सुधीर जावला, सेल मैनेजर सुरेंद्र सिंह व दलबीर, केमिस्ट संजय कुमार तथा क्लर्क रणबीर व राममेहर जैसे नाम संबंधित प्राथमिकी में दर्ज किए गए हैं और जांच के दायरे में हैं। इस कार्रवाई के सिलसिले में छह एसोसिएट्स को निलंबित कर दिया गया है जबकि पांच कर्मचारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे।

घोटाले का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता है क्योंकि मिलों में ऐसी हेराफेरी के कारण गन्ना निर्यात और शुद्ध तौल रिकॉर्ड प्रभावित होते हैं, जिससे किसान भुगतान में देरी और नुकसान झेलते हैं। अधिकारी बताते हैं कि ACB ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है, फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए पूरे लेखे-जोखे की गहन पड़ताल चल रही है और जांच पूरी होते ही दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कदम उठाए जाएंगे। किसानों को भी सचेत रहने की सलाह दी जा रही है कि वे मिलों में तौल और भुगतान के रिकॉर्ड पर नियमित निगरानी रखें ताकि भविष्य में इस तरह के दुरुपयोग से बचाव हो सके।

यह घोटाला केवल एक वित्तीय अनियमितता नहीं है, बल्कि एक प्रणालीगत भरोसेघात है जिसने सरकारी संस्थान और सीधे तौर पर गन्ना उत्पादकों की आमदनी पर असर डाला है, और अब सवाल उठता है कि बेहतर निगरानी तंत्र और पारदर्शी स्टॉक मेनेजमेंट के बिना ऐसे मामले कितनी आसानी से दोबारा हो सकते हैं।