रेलूराम पूनिया हत्याकांड में बड़ा फैसला: 8 सदस्यों की हत्या, 20 साल जेल—अब बेटी-दामाद को मिली रिहाई की मंजूरी

पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया हत्याकांड में दोषी बेटी सोनिया और दामाद संजीव की समयपूर्व रिहाई याचिका हाईकोर्ट ने मंजूर की। 2001 में परिवार के 8 लोगों की हत्या हुई थी।

रेलूराम पूनिया हत्याकांड में बड़ा फैसला:  8 सदस्यों की हत्या, 20 साल जेल—अब बेटी-दामाद को मिली रिहाई की मंजूरी
  • रेलूराम पूनिया हत्याकांड के दोषियों सोनिया और संजीव की रिहाई याचिका हाईकोर्ट में मंजूर

  • 2001 में 8 सदस्यों की हत्या, बेटी-दामाद ने जमीन विवाद के लिए दिया था वारदात को अंजाम

  • 20 साल से ज्यादा सजा काट चुके, कोर्ट ने कहा सभी परिस्थितियों पर विचार जरूरी

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हरियाणा के चर्चित रेलूराम पूनिया हत्याकांड में दोषी करार दिए गए बेटी सोनिया और दामाद संजीव कुमार को जेल से रिहा किया जाएगा। मंगलवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस सूर्या प्रताप सिंह ने दोनों की समय से पहले रिहाई की याचिका मंजूर करते हुए आदेश जारी किया।

याचिका में यह तर्क दिया गया कि संजीव 20 साल की वास्तविक सजा काट चुका है और छूट अवधि को जोड़ने पर कुल सजा 25 साल 9 महीने बनती है। इसी प्रकार सोनिया भी लंबी अवधि तक जेल में रह चुकी है

यह मामला 23 अगस्त 2001 को हिसार के लितानी गांव में हुआ था, जहां फार्महाउस में पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया(50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी(41), बेटा सुनील(23), बहू शकुंतला(20), बेटी प्रियंका(14), पोता लोकेश(4), पोती शिवानी(2) और 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी गई थी।

जांच में सामने आया कि सोनिया और संजीव ने जमीन-जायदाद के विवाद के कारण पूरे परिवार को लोहे की रॉड और डंडों से सोते समय मार दिया था। वारदात के बाद दोनों ने खुदकुशी का प्रयास भी किया, लेकिन बच गए।

साल 2004 में हिसार अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में आदेश बरकरार रखा। बाद में दया याचिका में देरी के आधार पर 2014 में सजा उम्रकैद में बदल गई

दोषियों ने 6 अगस्त 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि संजीव को पूरी जिंदगी जेल में रहना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य स्तरीय कमेटी ने पुनर्वास और सुधार रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया और अन्य कैदियों को राहत देकर उन्हें भेदभाव का शिकार बनाया गया।

हाईकोर्ट ने सभी पक्ष सुनने के बाद रिहाई की मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद राज्य में सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।