हरियाणा में रिश्वतखोर पुलिसकर्मी सीधे होंगे बर्खास्त, DGP ओपी सिंह का सख्त आदेश, जांच की जरूरत नहीं
हरियाणा में रिश्वतखोरी पर DGP ओपी सिंह ने सख्त आदेश जारी किए हैं। रंगे हाथ पकड़े गए पुलिसकर्मियों को जांच के बिना नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा।
- हरियाणा में रिश्वतखोर पुलिस कर्मियों की तुरंत बर्खास्तगी के आदेश
- DGP ओपी सिंह बोले, रंगे हाथ पकड़े गए तो जांच की जरूरत नहीं
- भ्रष्टाचार मामलों में पुलिस विभाग सबसे आगे
हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बड़ा आदेश जारी किया है। DGP ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया है कि रिश्वत लेते हुए जो भी पुलिसकर्मी या अधिकारी रंगे हाथ पकड़े जाएंगे, उनके खिलाफ जांच बिठाने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे कर्मियों को सीधे नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा।
DGP ओपी सिंह ने अपने संदेश में लिखा है कि ठग और बदमाश चाहे पुलिस में हों या समाज में, पुलिस विभाग की नीति स्पष्ट है। उन्होंने सभी एसपी और सीपी को निर्देश दिए हैं कि रंगे हाथ पकड़े गए कर्मचारियों के मामलों में संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत प्रदत्त विशेष अधिकारों का इस्तेमाल कर तुरंत बर्खास्तगी की जाए।
उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में जो भी पुलिसकर्मी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं, उनके साथ यही कार्रवाई की गई है और आगे भी यही नीति लागू रहेगी। पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा है कि जैसी करनी वैसी भरनी।
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के आठ महीनों यानी 212 दिनों में कुल 105 केस दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 141 लोगों को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इनमें 112 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी तथा 29 निजी व्यक्ति शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक औसतन हर दो दिन में एक सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। भ्रष्टाचार के मामलों में पुलिस विभाग सबसे आगे है, जहां 33 अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए हैं। इसके बाद राजस्व विभाग में 17 कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है।
रिश्वतखोरी के मामलों में एक प्रथम श्रेणी अधिकारी, आठ द्वितीय श्रेणी अधिकारी, 95 तृतीय श्रेणी कर्मचारी और आठ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। पकड़े गए कुल 141 लोगों से 85 लाख 33 हजार 900 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई है।
ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस विभाग में निरीक्षक, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, मुख्य सिपाही और सिपाही तक रेट तय करते पकड़े गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के सात, शहरी स्थानीय निकाय और खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग के चार-चार, बिजली विभाग के चार, आबकारी एवं कराधान तथा परिवहन विभाग के तीन-तीन कर्मचारी भी रिश्वतखोरी के मामलों में बेनकाब हुए हैं।
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